लखनऊ विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ राजीव मनोहर ने आज पूर्वाह्न 10 बजे डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू), रांची के कुलपति का पदभार ग्रहण किया । झारखंड के राज्यपाल-सह-कुलाधिपति के निर्देशानुसार वह पदभार ग्रहण करने की तिथि से अगले तीन वर्ष तक इस पद पर कार्य करेंगे। पदभार ग्रहण के उपरांत तत्काल उन्होंने शिक्षकेत्तर कर्मियों से उनकी समस्याओं पर बात करने की पहल करते हुए उनके सकारात्मक त्वरित निष्पादन की बात कही। उन्होंने उन्हें आश्वस्त किया कि अति शीघ्र इसका निष्पादन किया जाएगा। कर्मियों ने भी उन्हें शिक्षण और अन्य प्रशासनिक कार्यों में अपना सहयोग देने का आश्वासन दिया। उन्होंने कक्षाओं के सुचारू संचालन में सकारात्मक सहयोग देने की बात कही। इसके उपरांत आज डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची में कुलपति के तौर पर कार्यभार ग्रहण करते हुए अपराह्न 2 बजे उन्होंने विश्वविद्यालय के गांधी सभागार में सभी संकायों के डीन, विभागाध्यक्षों और शिक्षकों के साथ प्रथम महत्वपूर्ण संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता विश्वविद्यालय की मूलभूत समस्याओं को चिन्हित कर उनके निराकरण की होगी। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षकों से यह अपेक्षित होगा कि वह नियत समय पर वर्ग संचालन और गुणवता पूर्ण शिक्षण सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की पहचान शोध और अनुसंधान से होती है अतः इस दिशा में उनका पूरा प्रयास और सहयोग विश्वविद्यालय परिवार को प्राप्त होगा। उन्होंने विद्यार्थियों के लिए शिक्षण प्रणाली को भी रुचिकर और प्रासंगिक बनाने की बात कही । उन्होंने कहा कि शिक्षकों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि विश्वविद्यालय द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों के दायित्व निर्वहन के दौरान भी वह अपने विषय से संबंधित कक्षाएं लेना सुनिश्चित करें। उनका स्वयं का भी यह प्रयास होगा कि वह भौतिकी के शिक्षक होने के नाते कुलपति का दायित्व निभाने के साथ साथ विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की कक्षाएं लेकर उनका मार्गदर्शन करें। गौरतलब है
डॉ. राजीव मनोहर ने इसके पूर्व लखनऊ विश्वविद्यालय में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के निदेशक के तौर पर लखनऊ विश्वविद्यालय को नैक की ए प्लस प्लस रेटिंग के निर्धारण में महती भूमिका निभाई थी। तीन दशक से अधिक के शैक्षणिक कॅरिअर में उन्होंने संघनित पदार्थ भौतिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। विशेष रूप से लिक्विड क्रिस्टल और नैनोमैटेरियल कॉम्पोजिट्स पर उनके शोध को वैश्विक पहचान मिली है। उनके 400 से अधिक शोध-पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। यह जानकारी पीआरओ डॉ राजेश कुमार सिंह ने दी।



