हेमंत सरकार के 6 साल ‘बर्बादी के साल’, भाजपा ने जारी किया आरोप पत्र — बाबूलाल मरांडी का बड़ा हमला

हेमंत सरकार के छह साल को भाजपा ने झारखंड की “बर्बादी के साल” करार देते हुए आज प्रदेश कार्यालय में विस्तृत आरोप पत्र जारी किया। प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, सांसद आदित्य साहू, संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, विधायक नवीन जायसवाल और मीडिया प्रभारियों की उपस्थिति में जारी इस आरोप पत्र में सरकार पर सातों गारंटी को ठगने, भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने और जनता को लगातार धोखा देने का आरोप लगाया गया। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि इंडी गठबंधन ने चुनाव के समय सात गारंटी देने का दावा किया था, लेकिन इनमें से एक भी वादा पूरा नहीं हुआ, बल्कि राज्य को कई साल पीछे धकेल दिया गया। उन्होंने 1932 खतियान आधारित नीति को “सबसे बड़ा धोखा” बताते हुए कहा कि इस मुद्दे पर छह साल से जनता को सिर्फ भ्रमित किया जा रहा है और राज्य में भाषा-संस्कृति संरक्षण की जगह चंगाई सभा जैसे अंधविश्वास को बढ़ावा दिया जा रहा है।

मरांडी ने मइयां सम्मान योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितता का आरोप लगाते हुए कहा कि लाखों महिलाओं के नाम सूची से हटाए गए, ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं पोर्टल बंद होने से परेशान हैं और उल्टे इस योजना की राशि रोहिंग्या व बांग्लादेशी घुसपैठियों तक पहुंचने की शिकायतें सामने आ रही हैं। सामाजिक न्याय के मोर्चे पर भी सरकार को विफल बताते हुए उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव ओबीसी आरक्षण के बिना हुए, निकाय चुनाव में भी कुछ नहीं हुआ और एससी-एसटी आरक्षण पर भी जनता को धोखा दिया गया। खाद्य सुरक्षा गारंटी पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार सात किलो अनाज देने में विफल रही, उल्टे पांच किलो दिए जाने पर भी घोटाले उजागर हुए, जिसमें मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र के पतना का बड़ा अनाज घोटाला भी शामिल है। गैस सिलेंडर 450 रुपये में देने का वादा सरकार ने खुद ही नकार दिया।

रोजगार और स्वास्थ्य सुरक्षा पर मरांडी ने कहा कि 10 लाख नौकरी और 15 लाख के स्वास्थ्य बीमा की घोषणा पूरी तरह झूठ साबित हुई। छह वर्षों में 30 हजार कर्मचारियों के रिटायर होने के बावजूद सरकार ने केवल 8,791 लोगों को नियुक्ति पत्र देकर ढिंढोरा पीटा, जबकि दो लाख से अधिक पद समाप्त कर दिए। उन्होंने 2019 की उत्पाद सिपाही भर्ती में गर्मी में दौड़ होने से 19 युवाओं की मृत्यु पर सरकार को “बेशर्म” कहा। परीक्षाओं में धांधली के आरोपों पर सीबीआई जांच से बचने का आरोप भी लगाया गया। मरांडी ने शिक्षा और उद्योग गारंटी को पूरी तरह असफल बताते हुए कहा कि न प्रखंडों में डिग्री कॉलेज खुले, न मेडिकल-इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय बने और न ही किसी जिले में 500 एकड़ का औद्योगिक पार्क स्थापित हुआ।

किसानों की गारंटी पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि 3,200 रुपये एमएसपी देने का वादा जुमला साबित हुआ। सरकार ने 2,400 रुपये का एमएसपी तय किया और उसपर भी लक्ष्य का आधा धान नहीं खरीदा गया। कई जिलों में भुगतान अब भी लंबित है। इसके साथ ही उन्होंने शराब घोटाला, जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा घोटाला, डीएमएफटी फंड, खेल किट, भवन निर्माण, प्रमाणपत्र घोटाला, आपदा मोचन निधि सहित दर्जनों घोटाले गिनाते हुए कहा कि यह सरकार भ्रष्टाचार की श्रृंखला चलाने में व्यस्त रही। उन्होंने दावा किया कि आदिवासी समाज सबसे अधिक प्रताड़ित हुआ है—दुमका से चाईबासा तक आदिवासी युवतियों के साथ दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ी हैं और सरकार पूरी तरह विफल रही है।

मरांडी ने कहा कि बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के कारण राज्य की जनसांख्यिकी बदल रही है और सरकार उनका संरक्षण कर रही है। विधानसभा में सत्ता पक्ष के लोगों द्वारा एसआईआर प्रक्रिया का विरोध करते हुए बेल में घुस जाना लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन है। बीएलओ को धमकी देने वाली भाषा में बोलना सरकार की कार्यशैली को उजागर करता है। उन्होंने अंत में कहा कि हेमंत सरकार वादों की धोखेबाज़ सरकार साबित हुई है और सभी घोटालों की सीबीआई जांच कराने के साथ घुसपैठियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *