
घाटशिला उपचुनाव की मतगणना ने शुक्रवार को जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज परिसर को राजनीतिक भावनाओं के केंद्र में बदल दिया। जहां सुबह उम्मीदों की किरण लिए कार्यकर्ता पंडालों में जुटे थे, वहीं दोपहर तक यह परिसर विजयी उल्लास और हताशा दोनों का प्रतीक बन गया।
सुबह 9 बजे झामुमो और भाजपा दोनों के खेमों में जोश चरम पर था। झामुमो समर्थक सुमन महतो के साथ रणनीतिक चर्चा और चाय की चुस्कियों में मशगूल थे, जबकि भाजपा के कार्यकर्ता “कमल खिलेगा” के आत्मविश्वास के साथ माहौल गरमाए हुए थे। भाजपा के चुनाव प्रभारी अभय सिंह और नंदजी प्रसाद के पहुंचने से वहां उत्साह और भी बढ़ा।
राउंड दर राउंड बदलता समीकरण
पहले राउंड की गणना ने हल्की हलचल पैदा की, लेकिन दूसरे राउंड के बाद झामुमो उम्मीदवार सोमेश चंद्र सोरेन ने 5,454 वोटों की बढ़त बनाकर बढ़त का स्पष्ट संकेत दे दिया।
चौथे राउंड में यह अंतर 7,104 तक पहुंचा और नौवें राउंड तक बढ़त 15,000 पार कर गई। इस बीच भाजपा पंडाल का माहौल बदलना शुरू हो चुका था—जोश और जयकारों की जगह चिंतित चेहरे दिखाई देने लगे।
दोपहर 12 बजे जैसे ही भाजपा प्रत्याशी बाबूलाल सोरेन मतगणना स्थल पहुंचे, बढ़ते अंतर ने उनकी उम्मीदों को झटका दिया और वे चुपचाप वापस लौट गए। यह मौन वापसी मानो हार की दस्तक थी।
झामुमो की पकड़ मजबूत, भाजपा खेमे में सन्नाटा
दोपहर 2 बजे तक स्थिति पूरी तरह साफ हो चुकी थी। झामुमो की बढ़त 23,000 के पार पहुंच चुकी थी और तेरहवें राउंड तक यह अंतर 23,385 हो गया। भाजपा पंडाल, जो सुबह ऊर्जा से भरा हुआ था, धीरे-धीरे खाली होने लगा।
वहीं दूसरी ओर झामुमो खेमे में ढोल-नगाड़ों की थाप, जय झारखंड के नारे और लगातार बढ़ते अंतर ने जश्न की लय तेज कर दी। 19वें राउंड तक सोमेश सोरेन की बढ़त बढ़कर 36,989 वोटों तक पहुंच गई—जो इस चुनाव की निर्णायक तस्वीर पेश करती है।
विजय का चरम क्षण
शाम करीब 5 बजे, जैसे ही विजयी उम्मीदवार सोमेश सोरेन मतगणना स्थल पहुंचे, समर्थकों ने उन्हें कंधों पर उठा लिया। विधायक मंगल कालिंदी और समीर मोहंती का भोजन लेकर पहुंचना मानो इस जीत को सामूहिक उत्सव का रूप दे रहा था।
झामुमो की यह जीत सिर्फ सीट हासिल करने की सफलता नहीं थी, बल्कि राजनीतिक रणनीति, संगठन की मजबूती और क्षेत्र के मतदाताओं के भरोसे का प्रमाण थी। घाटशिला उपचुनाव पर झामुमो की निर्णायक वापसी ने आने वाले राजनीतिक समीकरणों पर गहरा असर डालने के संकेत दे दिए हैं।
