सोमेश सोरेन ने 38,524 वोटों की प्रचंड बढ़त से भाजपा को दी करारी शिकस्त,
स्टार प्रचारक कल्पना सोरेन की रणनीति साबित हुई ‘गेमचेंजर’*

घाटशिला विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने झारखंड की सियासत में बड़ा संदेश दे दिया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने इस चुनाव में न सिर्फ बढ़त बनाई, बल्कि भारी अंतर से जीत भी हासिल कर ली। चुनाव आयोग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जेएमएम प्रत्याशी सोमेश सोरेन ने भाजपा के बाबूलाल सोरेन को 38,524 वोटों के भारी अंतर से पछाड़ दिया है। हालांकि अधिकारिक घोषणा शेष है, लेकिन जीत लगभग तय मानी जा रही है।
📊 अंतिम आंकड़े (गैर-आधिकारिक)
- सोमेश सोरेन (JMM) – 1,04,794 वोट
- बाबूलाल सोरेन (BJP) – 66,270 वोट
- JLKM प्रत्याशी – 11,542 वोट (तीसरा स्थान)
यह चुनाव परिणाम साफ दर्शाता है कि घाटशिला की जनता ने जेएमएम पर भरोसा जताते हुए भाजपा को करारा जवाब दिया है।
⭐ कल्पना सोरेन बनीं जीत की सबसे मजबूत धुरी
जेएमएम की स्टार प्रचारक कल्पना सोरेन की ग्राउंड रणनीति, निरंतर जनसंपर्क और महिलाओं–युवाओं से जुड़ाव ने चुनाव का पूरा माहौल जेएमएम के पक्ष में मोड़ दिया।
चुनावी मैदान में उनके रोड शो, नुक्कड़ सभाएँ और भावनात्मक अपीलों ने सोमेश सोरेन को बड़ी बढ़त दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई।
स्थानीय जनता ने खुले रूप में कहा कि “कल्पना सोरेन की मेहनत और उपस्थिति ने ही चुनाव में JMM को बढ़त दिलाई।”
🗳️ भाजपा को बड़ा झटका, जेएलकेएम तीसरे स्थान पर सिमटा
भाजपा के बाबूलाल सोरेन, जो खुद इस क्षेत्र के मजबूत दावेदार माने जाते थे, इस बार पूरी तरह पिछड़ गए।
38 हजार से अधिक वोटों का अंतर घाटशिला की राजनीतिक दिशा का स्पष्ट संकेत है।
वहीं, चर्चित चेहरा और चर्चित चुनावी अभियान के बावजूद JLKM प्रत्याशी सिर्फ तीसरे स्थान पर सिमट गए।
📍 घाटशिला की जनता का साफ संदेश
जनता ने इस उपचुनाव में अपने वोट से बता दिया कि—
- उन्हें विकास चाहिए,
- स्थानीय नेतृत्व पर भरोसा है,
- और जेएमएम की नीतियों पर विश्वास बरकरार है।
ग्रामीण से लेकर शहरी इलाकों तक, महिलाओं से लेकर युवाओं तक, इस बार जेएमएम को रिकॉर्ड समर्थन मिला।
🔥 निष्कर्ष: घाटशिला में JMM की ‘मेगा जीत’, झारखंड की राजनीति में बड़ा बदलाव संकेतित!
सोमेश सोरेन की ऐतिहासिक जीत,
कल्पना सोरेन का मैदान में दमदार प्रदर्शन,
और भाजपा की तगड़ी हार—
यह उपचुनाव आने वाले राजनीतिक समीकरणों पर गहरा प्रभाव डालने वाला है।
आगे क्या होगा, यह राजनीति तय करेगी—लेकिन घाटशिला ने अपना फैसला सुना दिया है!
