जेयूटी के कुलपति और रांची विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो धर्मेंद्र कुमार सिंह ने डीएसपीएमयू के प्रभारी कुलपति का अतिरिक्त प्रभार ग्रहण किया।

वर्तमान में शिक्षकों के शिक्षण व्याख्यान में अकादमिक और प्रेरक विषयवस्तु का सम्मिश्रण प्रासंगिक। डॉ डीके सिंह

रांची:
डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU), रांची के नवनियुक्त प्रभारी कुलपति डॉ डी.के. सिंह ने आज पूर्वाह्न 11 बजे विश्वविद्यालय का कार्यभार ग्रहण किया। वे झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (JUT) के कुलपति एवं रांची विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह द्वारा DSPMU के प्रभारी कुलपति का अतिरिक्त प्रभार सौंपे जाने के बाद इस पद पर आसीन हुए।

कार्यभार ग्रहण करने के उपरांत प्रभारी कुलपति डॉ डी.के. सिंह ने विश्वविद्यालय के नए प्रशासनिक भवन में सभी प्रशासनिक अधिकारियों, सभी संकायों के डीन एवं विभिन्न विभागाध्यक्षों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक के दौरान विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, प्रशासनिक और शोध से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत संवाद और विमर्श हुआ।

अपने संबोधन में डॉ डी.के. सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षण की पारंपरिक प्रणाली में बदलाव की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षकों को प्रति कक्षा अपने व्याख्यान में अकादमिक विषयवस्तु के साथ-साथ प्रेरक तत्वों का सम्मिश्रण करना चाहिए, ताकि विद्यार्थी न केवल ज्ञान अर्जित करें बल्कि जीवन और करियर के लिए भी प्रेरित हों।

लंबे संवाद के दौरान कुलपति ने विश्वविद्यालय में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर सांख्यिकी की पढ़ाई शीघ्र प्रारंभ करने पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन पाठ्यक्रमों को स्वपोषित मोड में संचालित किया जाएगा। साथ ही, साइबर शिक्षा की बढ़ती प्रासंगिकता को ध्यान में रखते हुए साइबर सिक्योरिटी से जुड़े पाठ्यक्रम जल्द शुरू करने की बात कही।

डॉ डी.के. सिंह ने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों को अधिक रोजगारमूलक बनाया जाए, ताकि यहां के विद्यार्थी वर्तमान व्यावसायिक दुनिया की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकें। उन्होंने पीएचडी शोधार्थियों के लिए नियमावली को अधिक लचीला बनाए रखने पर भी जोर दिया और इसके लिए एक समिति के गठन का निर्देश दिया।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने विश्वविद्यालय में नियमित अंतराल पर कार्यशालाओं के आयोजन को प्राथमिकता सूची में शामिल करने की बात कही, जिससे शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों को अकादमिक रूप से लाभ मिल सके।

इस बैठक में कुलसचिव डॉ धनंजय द्विवेदी, सभी संकायों के डीन, विभागाध्यक्ष एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे। उक्त जानकारी विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ राजेश कुमार सिंह द्वारा दी गई।

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