गलत ब्लड ग्रुप चढ़ाने से महिला की मौत मामले में जांच तेज, बिमसार का ओटी व एक वार्ड सील

खूँटी । जिले के जियारप्पा स्थित नवनिर्मित बिमसार अस्पताल में हुई एक महिला गलत खून चढ़ाने जाने के बाद हुई मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन के द्वारा अनुसंधान का दायरा बढ़ गया है।

 इस बड़ी घटना के बाद स्व बुधन देवी के सभी कागजातों का निरीक्षण कर अनुसंधान तेज हो गया है। जो कि एक मरीज बुधन देवी के बिमसार अस्पताल में हुई पथरी का ऑपरेशन हुआ था। वहीं इलाज में अन्य सभी सम्बंधित अस्पताल पर भी अनुसंधान किया जा रहा है जहां खून का ग्रुप  टेस्ट हुआ था। कि आखिर मरीज बुधन देवी का इलाज में उसका रक्त का ग्रुप गलत आखिर कैसे हो गया। एक तरफ बिमसार प्रबंधन का मानना है कि उसका खून ए पॉजिटिव ग्रुप ही था। जबकि अन्य तीन जगह खून का ग्रुप जाँच किये जाने का मामला भी आया। जहाँ खून का ग्रुप ओ पॉजिटिव आने की बात कही जा रही है। वहीं रिम्स में भी ओ पॉजिटिव ग्रुप आया। वहीं अब दोषी कौन ? जबकि चार युनिट ब्लड चढ़ाने के बाद पारस अस्पताल द्वारा बाद में खून जाँच किये जाने के बाद पाँचवें युनिट चढ़ाने के लिए खून देने गये लोगों को ओ पॉजिटिव खून का पता लगने के बाद खून नहीं दिया गया तो फिर परिजनों के द्वारा बताया गया कि सदर अस्पताल खूँटी, बिरसा पैथो लैब में भी खून जांच किया गया। जहाँ वहाँ भी ओ पॉजिटिव ग्रुप का खून होने की बात बतायी गयी । जबकि आगे की कार्रवाई करते हुए बुधन देवी को रिम्स रेफर कर दिया जाता है। रेफर के बाद तीन जुलाई को रिम्स में बुधन का उपचार शुरू हुआ। जहाँ रिम्स में भी खून का ग्रुप जाँच हुआ तो ओ पॉजिटिव ग्रुप ही निकला। लेकिन आखिर तीन तीन युनिट खून बुधन देवी को ए पॉजिटिव खून चढ़ा दिया गया। लेकिन अब उसकी अंततोगत्वा मौत के बाद खूंटी थाने में मामला दर्ज हो गया है। वहीं गलत ब्लड ग्रुप मामले में अनुसंधान शुरू हो गया है। और इसकी मौत का कारण का पता लगाया जाने लगा है। सिविल सर्जन डॉ ललित रंजन पाठक ने बताया कि अभी वर्तमान में बिमसार के ऑपरेशन थियेटर और एक वार्ड को सील कर दिया गया है। वहीं आगे अनुसंधान किया जा रहा है। स्व बुधन देवी के हुए इलाज के सारे दस्तावेज कागजात को लेकर आगे अनुसंधान किया जा रहा है। 

       इधर , दोषियों पर कार्रवाई के लिए पीड़ित परिवार ने प्रशासन से गुहार लगाई है। लेकिन दोषी पर कार्रवाई मामले में कब तक पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा कहना मुश्किल है। अब न्याय की आस प्रशासन पर टिकी हुई है।

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