डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग के तत्वावधान में सोमवार को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर “जयंती समारोह सह पुरस्कार वितरण समारोह” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजीव मनोहर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में कुलपति प्रो. राजीव मनोहर ने कहा कि “डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय चेतना के प्रमुख स्वर हैं।” उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने भारतीय शिक्षा परंपरा को लोक परंपरा एवं लोक ज्ञान से जोड़ने का कार्य किया, जिसके परिणामस्वरूप नई शिक्षा नीति को नई दिशा मिली। उन्होंने भारतीय भाषाओं और भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन पर बल देते हुए कहा कि वैचारिक मतभिन्नता के बावजूद डॉ. मुखर्जी आज भी सभी के लिए प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा चरित्र निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण आधार है।
विशिष्ट अतिथि एवं कुलसचिव डॉ. धनंजय वासुदेव द्विवेदी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रवाद के प्रमुख व्यक्तित्व होने के साथ-साथ औद्योगिक विकास के क्षेत्र में भी उनके योगदान को सदैव याद किया जाएगा।
कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. जिन्दर सिंह मुण्डा ने स्वागत भाषण में कहा कि डॉ. मुखर्जी ने मातृभाषा के महत्व पर विशेष बल दिया तथा “एक देश, एक विधान” के सिद्धांत को मजबूत स्वर प्रदान किया। वहीं डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जनसंघ की स्थापना कर भारतीय राजनीति में उच्च आदर्शों की स्थापना की।
इस अवसर पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में संस्कृत विभाग के उत्तम कुमार महतो ने प्रथम, हिंदी विभाग की रिया मिश्रा ने द्वितीय तथा अंग्रेजी भाषा एवं साहित्य विभाग के कुणाल कुमार ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं वाद-विवाद प्रतियोगिता में पत्रकारिता विभाग के चंद्रदेव उरांव प्रथम, राजनीति विज्ञान विभाग की स्नेहा कुमारी द्वितीय तथा गणित विभाग की तनु कुमारी तृतीय स्थान पर रहीं।
कार्यक्रम का संचालन मनीष कुमार मिश्रा ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आशा कुमारी गुप्ता ने किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. मृत्युंजय, डॉ. जितेंद्र, डॉ. विजय, डॉ. जय किशोर मंगल, डॉ. डुमनी, डॉ. मनीषा, संजय एवं त्रिभुवन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम की जानकारी विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. राजेश कुमार सिंह ने दी।

