पूर्व रेलवे ने यात्री सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि हासिल करते हुए ‘कवच 4.0’ प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू कर दिया है। कोलकाता में 27 अप्रैल 2026 को दी गई जानकारी के अनुसार, महाप्रबंधक मिलिंद देऊस्कर के नेतृत्व में यह अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली हावड़ा से छोटा अंबाना तक 260 किलोमीटर के महत्वपूर्ण रेलखंड पर पूरी तरह चालू हो चुकी है।
‘कवच’, जिसका अर्थ है सुरक्षा कवच या ढाल, एक स्वदेशी तकनीक है जो ट्रेन के लिए डिजिटल गार्डियन की तरह कार्य करती है। यह प्रणाली हर पल ट्रेन की गतिविधियों पर नजर रखती है और मानवीय त्रुटियों को दुर्घटनाओं में बदलने से रोकती है। यदि चालक सिग्नल पार कर जाए या ट्रेन निर्धारित गति से अधिक तेज चलने लगे, तो यह स्वतः ब्रेक लगाकर नियंत्रण संभाल लेती है।
यह प्रणाली विशेष रूप से आमने-सामने या पीछे से होने वाली टक्करों को रोकने के लिए विकसित की गई है। खराब मौसम जैसे घने कोहरे या भारी बारिश में भी यह इंजन के अंदर ही चालक को रीयल-टाइम सिग्नल जानकारी देती है। साथ ही लेवल क्रॉसिंग के पास स्वतः हॉर्न बजाने और आपात स्थिति में एसओएस अलर्ट भेजने जैसी सुविधाएं भी इसमें शामिल हैं।
हावड़ा-नई दिल्ली जैसे व्यस्त रेल मार्ग के इस खंड पर 120 इंजनों में कवच 4.0 की स्थापना की गई है, जिससे न केवल सुरक्षा बल्कि यात्रा की सुगमता भी बढ़ी है। गति की निरंतर निगरानी से ट्रेन संचालन अधिक संतुलित और आरामदायक हो गया है।
इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझि ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और कवच 4.0 के माध्यम से ‘शून्य टक्कर’ के लक्ष्य की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाया जा रहा है।
यह पहल ‘मेक इन इंडिया’ तकनीक के जरिए भारतीय रेलवे को वैश्विक सुरक्षा मानकों के करीब ले जा रही है और यात्रियों को अधिक सुरक्षित एवं भरोसेमंद यात्रा का अनुभव दे रही है।

