रांची: नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL) ने अपने 17वें स्थापना दिवस को भव्य समारोह के साथ मनाया, जिसमें देश के प्रतिष्ठित न्यायविदों ने छात्रों को कानून और नैतिकता के मार्ग पर प्रेरित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अहसानुद्दीन अमानुल्लाह (न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय) रहे, जिनका विश्वविद्यालय परिसर में पारंपरिक स्वागत किया गया।
⚖️ छात्रों को मिला न्यायिक मार्गदर्शन
अपने संबोधन में न्यायमूर्ति अमानुल्लाह ने कहा कि 17 वर्षों का सफर संस्थान की परिपक्वता को दर्शाता है। उन्होंने छात्रों को पूर्वाग्रहों से मुक्त रहकर कानून की पढ़ाई करने और आत्म-विकास पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। संवाद सत्र में उन्होंने न्यायिक सेवा और वकालत में आने वाली नैतिक चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की।
वहीं महेश शरदचंद्र सोनक (मुख्य न्यायाधीश, झारखंड उच्च न्यायालय) ने कानून को सामाजिक जिम्मेदारी बताते हुए छात्रों को समाज के प्रति उत्तरदायी बनने का संदेश दिया। कार्यक्रम में न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और महाधिवक्ता राजीव रंजन ने भी अपने विचार साझा किए।
💻 “साइबर सेफ झारखंड” अभियान का शुभारंभ
स्थापना दिवस के अवसर पर “साइबर सेफ एंड रेजिलिएंट झारखंड” पहल का पोस्टर जारी किया गया। यह पहल NUSRL के साइबर लॉ सेंटर (CAGE) और साइबर पीस फाउंडेशन के सहयोग से शुरू की गई है। इसके तहत राज्यभर में “साइबर फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स” तैयार करने के लिए मुफ्त ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स चलाया जाएगा।
🏆 मेधावी छात्रों को सम्मान
कुलपति डॉ. अशोक आर. पाटिल ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय के छात्र अकादमिक और सामाजिक दोनों क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं।
- 18 छात्रों को मेरिट स्कॉलरशिप प्रदान की गई
- 35 से अधिक छात्रों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया
🎭 ‘आविर्भाव 6.0’ का रंगारंग समापन
23 अप्रैल से चल रहे वार्षिक सांस्कृतिक उत्सव ‘आविर्भाव 6.0’ और ‘के.एन. प्रसाद मेमोरियल टूर्नामेंट’ का भी समापन हुआ। देशभर के संस्थानों ने इसमें भाग लिया, जहां ओपन माइक और कविता प्रतियोगिता में आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ, मोहाली का दबदबा रहा। वहीं MUN में जेवीएम श्यामली और डीपीएस रांची के छात्रों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए ‘बेस्ट डेलीगेट’ का खिताब जीता।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में उत्साह और गौरव का माहौल देखने को मिला, जहां शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक जिम्मेदारी का अद्भुत संगम नजर आया।

