पूर्व रेलवे में इन दिनों स्वच्छता सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि एक व्यापक जनआंदोलन का रूप ले चुकी है। महाप्रबंधक मिलिंद देउस्कर के नेतृत्व में 15 अप्रैल से 14 मई तक चल रहे “स्वच्छता जागरूकता अभियान – स्वच्छ भारत स्वच्छ रेल” ने पूरे ज़ोन में नई ऊर्जा भर दी है।
अभियान के तहत चारों मंडलों में रेलवे के सभी विभागों के साथ-साथ भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। यह प्रयास अब केवल सफाई तक सीमित नहीं रहकर यात्रियों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
अभियान के 10वें दिन, स्वयंसेवकों की टीम ने ट्रेनों के भीतर जागरूकता फैलाने पर जोर दिया। आसनसोल से चित्तरंजन तक चलने वाली ट्रेन में यात्रियों को स्वच्छता का संदेश दिया गया, वहीं वर्धमान और बैंडेल स्टेशनों पर स्लोगन और जन-जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए लोगों को जागरूक किया गया।
25 अप्रैल को चित्तरंजन से मधुपुर के बीच चलने वाली ट्रेनों में अभियान को और गति दी गई। नैहाटी स्टेशन पर पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता ने स्वच्छता को एक रचनात्मक स्वरूप दिया, जबकि अन्य प्रमुख स्टेशनों पर भी यात्रियों को साफ-सफाई के प्रति प्रेरित किया गया।
26 अप्रैल को दक्षिणेश्वर और बालीगंज स्टेशनों पर अभियान का प्रभाव और व्यापक रूप में देखने को मिला। यहां ट्रैक और डिब्बों की सफाई के साथ-साथ यात्रियों को स्वच्छता की शपथ दिलाई गई। खास बात यह रही कि इस अभियान में युवा और वरिष्ठ—दोनों पीढ़ियों ने मिलकर भागीदारी निभाई।
पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझी ने कहा कि यह अभियान केवल प्लेटफॉर्म की सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों की सोच में बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि इस पहल से यात्रियों में स्वच्छता को लेकर जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना तेजी से बढ़ रही है।
रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे इस मुहिम का हिस्सा बनें और स्वच्छ, स्वस्थ और बेहतर रेल यात्रा के निर्माण में सहयोग करें।

