हजारीबाग में सामने आए राजकोषीय घोटाले को लेकर सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। इस मामले में पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता अंबा प्रसाद ने अपनी ही सरकार पर सवाल खड़े करते हुए जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर चिंताएं जताई हैं।
अंबा प्रसाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए एक समाचार पत्र का हवाला दिया। उन्होंने लिखा कि इस कथित घोटाले की जांच उन्हीं अधिकारियों के हाथों में सौंपी गई है, जिन्हें सरकारी खजाने के संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी दी गई थी। ऐसे में जांच की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि यदि सरकारी तंत्र के भीतर ही राजस्व की लूट के लिए सेंधमारी की स्थिति उत्पन्न हो जाए, तो राज्य के विकास की कल्पना कैसे की जा सकती है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
हजारीबाग के इस राजकोषीय घोटाले को लेकर विपक्षी दल पहले से ही सरकार पर हमलावर हैं, लेकिन अब सत्तारूढ़ दल के ही नेताओं द्वारा उठाए जा रहे सवालों ने मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और गरमा सकता है।
