वाराणसी। धर्मनगरी वाराणसी में दीपावली के पावन अवसर पर रविवार को मुस्लिम महिलाओं ने भगवान श्रीराम और माता सीता की आरती उतारकर सामाजिक सद्भाव, सांस्कृतिक एकता और आपसी भाईचारे का संदेश दिया। महिलाओं ने पारंपरिक रूप से सजी थालियों में दीप प्रज्ज्वलित कर पूरे श्रद्धाभाव से श्रीराम महाआरती में भाग लिया।
विशाल भारत संस्थान एवं मुस्लिम महिला फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में रविवार काे लमही स्थित सुभाष भवन में श्रीराम महाआरती कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने कहा कि दीपावली जैसे पर्व किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं हैं बल्कि ये पूरे देश की साझा सांस्कृतिक परंपरा और विरासत का हिस्सा हैं। जब कुछ लोग भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं को लेकर समाज में विभाजन पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं, ऐसे समय में उन्होंने अपनी धार्मिक पहचान से ऊपर उठकर साझा विरासत और सामाजिक समरसता का संदेश देने की पहल की है। महिलाओं ने कहा कि धर्म बदलने से हम अरबी नहीं हो जाएंगे और न ही अरब की संस्कृति हमारी संस्कृति बन जाएगी। हमारी जड़ें भारत की मिट्टी और यहां की परंपराओं से जुड़ी हैं। हमें अपनी सांस्कृतिक पहचान और पूर्वजों की विरासत पर गर्व है।
मुस्लिम महिला फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नाजनीन अंसारी ने कहा कि भारत की धरती पर रहने वाले लोगों के धर्म और पूजा-पद्धतियां भले अलग-अलग हों लेकिन उनकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जड़ें एक-दूसरे से जुड़ी हैं। धर्म परिवर्तन से पूर्वज नहीं बदल जाते। उन्होंने कहा कि अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान से कटकर कोई भी समाज अपनी वास्तविक पहचान कायम नहीं रख सकता।
उन्होंने कहा कि जो लोग अरबी, तुर्की या ईरानी संस्कृति को अपनाकर अपनी पहचान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें समझना चाहिए कि भारत की अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है। हमें अपनी जड़ों, परंपराओं और पूर्वजों के गौरव को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। भगवान श्रीराम के जीवन से परिवार में त्याग, मर्यादा, समर्पण और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य की प्रेरणा मिलती है। रामराज्य की आधारशिला भी इन्हीं आदर्शों पर टिकी है।
विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजीव ने कहा कि मुस्लिम महिलाएं अपनी पहल से समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने का काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में परिवार और सामाजिक संबंध बिखर रहे हैं। ऐसे समय में भगवान श्रीराम के त्याग, मर्यादा और पारिवारिक मूल्यों को अपनाने की जरूरत है। विश्व शांति और सामाजिक समरसता के लिए सभी समुदायों को एक-दूसरे की सांस्कृतिक परंपराओं और आदर्शों का सम्मान करना चाहिए।
डॉ. नजमा परवीन ने कहा कि रामराज्य की परिकल्पना केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के अनेक देशों के लिए आदर्श रही है। भगवान श्रीराम के जीवन और आदर्शों को पढ़ने-समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि घर-घर में श्रीराम के त्याग, मर्यादा और आदर्शों की चर्चा होनी चाहिए। इससे परिवारों में प्रेम, सद्भाव और समृद्धि का वातावरण बनेगा।
श्रीराम महाआरती कार्यक्रम में नगीना बेगम, नाजमा बानो, शमसुननिशा, तबस्सुम, डॉ. अर्चना भारतवंशी, डॉ. मृदुला जायसवाल, जीनत रहमान, रोकसार परवीन, प्रज्ञा, इली, खुशी, उजाला, दक्षिता, सरोज, पूनम और सुनीता सहित अन्य महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं ने भारतीय संस्कृति की साझी विरासत, धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक एकता का संदेश देते हुए दीपावली के पर्व को आपसी प्रेम और सद्भाव के साथ मनाने का आह्वान किया।

