
नई दिल्ली: संविधान दिवस 2025 के अवसर पर भारतीय संसद के सेंट्रल हॉल में आज एक भव्य और गरिमामय कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें भारत की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ किया गया। यह कार्यक्रम संविधान के महत्व, उसकी विरासत और नागरिकों के लोकतांत्रिक मूल्यों को स्मरण करने का एक ऐतिहासिक क्षण बन गया।
इस महत्वपूर्ण आयोजन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह सहित देश के शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रस्तावना पाठ से हुई, जिसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दोनों सदनों को संबोधित करते हुए संविधान की भावना, मूल्यों और देश के लोकतांत्रिक ढांचे की मजबूती पर अपने विचार रखे।
राष्ट्रपति ने इस अवसर पर कहा कि संविधान भारत की आत्मा है, जो हर नागरिक को समान अधिकार, न्याय और स्वतंत्रता का आश्वासन देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संविधान निर्माताओं को याद करते हुए कहा कि यह दिवस हमें देश की एकता, अखंडता और विकास के प्रति अपनी जिम्मेदारी का स्मरण कराता है।
76वें संविधान दिवस पर आयोजित इस समारोह ने देश को एक बार फिर संविधान के मूल सिद्धांतों—न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता—के प्रति प्रतिबद्ध किया। संसद के सेंट्रल हॉल में उमड़े इस सम्मान और गर्व ने एक बार फिर भारत को उसके लोकतांत्रिक मूल्यों की जड़ों से जोड़ दिया।

