
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने रांची से भव्य “झारखंड जतरा” को किया रवाना
रांची। झारखंड स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में रविवार को पर्यटन, कला, संस्कृति, खेलकूद और युवा कार्य विभाग की ओर से आयोजित भव्य ‘झारखंड जतरा’ ने राजधानी में जनजातीय अस्मिता, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की अद्भुत छटा बिखेरी।
जतरा की शुरुआत कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने जैप-1 के पास हरा झंडा दिखाकर और नगाड़ा बजाकर की। वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अलबर्ट एक्का चौक पर जतरा का स्वागत किया और शहीद चौक तक यात्रा में शामिल रहे। इस दौरान हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा कर जतरा की भव्यता को और बढ़ाया गया।
बिरसा के उलगुलान की गूंज, 4000 से अधिक कलाकार हुए शामिल
जतरा में रांची और आसपास के क्षेत्रों से जनजातीय समुदाय के 4000 से अधिक लोग शामिल हुए। पेशेवर कलाकारों से लेकर ग्रामीण समुदाय के बच्चे, युवा, बुजुर्ग—सभी पारंपरिक परिधानों में झारखंडी अस्मिता की अनोखी मिसाल बने।
जतरा का मार्ग जैप-1 से शुरू होकर ओवरब्रिज, सुजाता चौक, मेन रोड, अलबर्ट एक्का चौक और शहीद चौक से होते हुए बिरसा स्मृति पार्क में समाप्त हुआ।
यात्रा के दौरान कलाकारों ने उलगुलान का जीवंत प्रदर्शन किया। बिरसा मुंडा और ब्रिटिश सैनिकों के संघर्ष पर आधारित लघु नाटिका ने दर्शकों में रोमांच भर दिया।
गीत-संगीत में बसा झारखंड का आत्मा
पूरी यात्रा के दौरान नागपुरी, उरांव, मुंडा, संताल, खड़िया सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों के गीतों ने समां बांध दिया।
“अबुआ दिशुम अबुआ राज, उलगुलान रे…” जैसे गीतों ने जोश बढ़ाया।
महिलाएं लाल पाड़, पीली और हरी साड़ियों में सजकर शामिल हुईं, जबकि पुरुष धोती, गंजी, पारंपरिक पगड़ी में नजर आए। नगाड़ा, मांदर और घंटियों की गूंज पूरे रास्ते सुनाई देती रही।
झांकियों में उभरकर आया झारखंड का इतिहास और सौंदर्य
जतरा की लगभग एक दर्जन झांकियों ने झारखंड की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को जीवंत किया—
- डोंबारी बाना में बिरसा मुंडा और अंग्रेजों के संघर्ष की झांकी
- पहाड़ों और प्राकृतिक संपदा को दर्शाती झांकी
- सरहुल और करम पर्व पर आधारित प्रस्तुति
- सोहराई पेंटिंग बनाते ग्रामीण
- औद्योगिक विकास को दर्शाती झांकी
- छऊ नृत्य और जनजातीय आभूषणों पर आधारित झांकियां
इन सभी ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
झारखंड स्थापना दिवस पर यह भव्य जतरा राज्य की समृद्ध परंपराओं, सांस्कृतिक विविधता और एकता का अद्वितीय प्रतीक बनकर उभरा।

