पासपोर्ट सेवा तेज, सुलभ और वास्तव में लोकतांत्रिक बन चुकी हैः विदेश मंत्री

नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने शुक्रवार को क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारियों के वार्षिक सम्मेलन में कहा कि आज पासपोर्ट सेवा तेज, सुलभ और वास्तव में लोकतांत्रिक बन चुकी है। उन्होंने कहा कि विश्वभर में भारतीय प्रतिभा की मांग और प्रतिष्ठा तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में सुगम और प्रभावी पासपोर्ट सेवाएं एक समृद्ध, वैश्विक रूप से जुड़े विकसित भारत की महत्वपूर्ण आधारशिला बनेंगी।

जयशंकर ने कहा कि भारत की विदेश नीति देश को ‘विश्व बंधु’ के रूप में स्थापित कर रही है। इसके कारण भारतीय पासपोर्ट को दुनिया भर में सम्मान और विश्वास के साथ देखा जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पासपोर्ट प्राप्त करना संघर्ष का विषय नहीं बल्कि नागरिकों का अधिकार होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में पासपोर्ट जारी करने का आंकड़ा 138 लाख से अधिक पहुंच गया है। यह भारतीय नागरिकों की बढ़ती आकांक्षाओं और वैश्विक अवसरों की ओर उनके बढ़ते कदमों को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में देशभर में केवल 77 पासपोर्ट सेवा केंद्र थे और वार्षिक पासपोर्ट जारी करने की संख्या 83 लाख थी। सरकार के व्यापक विस्तार अभियान के परिणामस्वरूप अब 544 कार्यरत केंद्र स्थापित हो चुके हैं। इनमें 93 पासपोर्ट सेवा केंद्र और 454 डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्र शामिल हैं।

जयशंकर ने कहा कि पासपोर्ट सेवा कार्यक्रम संस्करण 2.0 ने विकसित भारत के लिए वैश्विक गतिशीलता को नई परिभाषा दी है। उनके अनुसार पासपोर्ट केवल यात्रा दस्तावेज नहीं, बल्कि आर्थिक प्रगति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और राष्ट्रीय पहचान का महत्वपूर्ण साधन है।

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