रांची : झारखंड में बालू संकट को खत्म करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री Hemant Soren ने बालू घाटों की बंदोबस्ती और खनन लीज प्रक्रिया को आसान बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब संबंधित जिलों के उपायुक्त (DC) ही बालू घाटों की खनन लीज को स्वीकृत और निष्पादित कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री की सहमति मिलने के बाद खान विभाग ने इस संबंध में सभी जिलों को आदेश जारी कर दिया है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से लंबे समय से लीज डीड के कारण अटके पड़े बालू घाट जल्द चालू हो सकेंगे और बाजार में बालू की उपलब्धता सामान्य होगी।
राज्य में पिछले कई महीनों से बालू की कमी के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे थे। आम लोगों को ऊंचे दाम पर बालू खरीदना पड़ रहा था, वहीं कई घाटों की प्रक्रिया फाइलों में अटकी हुई थी। अब DC स्तर पर अधिकार मिलने से प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।
सरकार का यह भी कहना है कि बालू घाटों के संचालन में पारदर्शिता आएगी और अवैध खनन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। प्रशासनिक स्तर पर त्वरित निर्णय होने से स्थानीय स्तर पर निगरानी भी बेहतर हो सकेगी।
खनन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नए आदेश के बाद जिलों में लंबित मामलों के निपटारे की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी ताकि आम जनता और निर्माण कार्यों को राहत मिल सके।
