
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रचंड जीत के बाद राज्य की राजनीति में संवैधानिक संकट जैसे हालात बन गए हैं। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अब तक अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया है। इस बीच राज्यपाल द्वारा विधानसभा भंग और नई सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू किए जाने की चर्चा तेज हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट गई। चुनाव में ममता बनर्जी सहित उनके कई वरिष्ठ मंत्री भी हार गए। चुनाव परिणाम आने के बाद ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव “षड्यंत्र” और “दबाव” के बीच कराए गए। उन्होंने साफ कहा कि वह इस्तीफा नहीं देंगी और यदि जरूरत पड़ी तो उन्हें बर्खास्त किया जाए।
कालीघाट स्थित आवास पर तृणमूल कांग्रेस के नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक में ममता बनर्जी ने चुनाव परिणाम को “काला दिन” बताया। उन्होंने पार्टी विधायकों से विरोध स्वरूप काला कपड़ा पहनने की अपील भी की।
संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए विधानसभा का विश्वास आवश्यक होता है। ऐसे में बहुमत खोने या चुनाव हारने के बाद राज्यपाल मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांग सकते हैं। यदि इस्तीफा नहीं दिया जाता, तो राज्यपाल मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद को पद से हटाने की कार्रवाई कर सकते हैं।
इधर, नई सरकार के शपथ ग्रहण तक प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने को लेकर भी चर्चा चल रही है। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि राज्यपाल अंतरिम व्यवस्था के तहत सीमित अवधि के लिए प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।
