राजधानी रांची में शनिवार को ‘महिला आक्रोश मार्च’ के तहत हजारों महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर अपनी एकजुटता और आक्रोश का प्रदर्शन किया। चिलचिलाती गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में महिलाओं ने मोरहाबादी मैदान से अल्बर्ट एक्का चौक तक पदयात्रा निकालकर अपने अधिकारों की आवाज बुलंद की।
यह मार्च प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के समर्थन और कांग्रेस, झामुमो सहित इंडी गठबंधन के विरोध में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मोरहाबादी मैदान में आयोजित एक सभा से हुई, जिसके बाद पदयात्रा निकाली गई।
इस आक्रोश मार्च का नेतृत्व केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है, जबकि विपक्षी दलों पर महिला विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने भी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि महिला आरक्षण को लेकर विपक्ष का रवैया महिलाओं के साथ अन्याय है। उन्होंने महिलाओं से सतर्क रहने और अपने अधिकारों के लिए आगे आने का आह्वान किया।
वहीं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि महिलाओं के गुस्से को नजरअंदाज करना विपक्ष के लिए भारी पड़ सकता है। केंद्रीय राज्य मंत्री संजय सेठ ने भी इस मुद्दे पर विपक्ष की आलोचना करते हुए महिलाओं के साथ ‘अन्याय’ का आरोप लगाया।
इस दौरान पद्मश्री सम्मानित छुटनी महतो और जमुना टुडू ने भी अपने विचार रखते हुए महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में आवाज उठाई।
मोरहाबादी मैदान से लेकर मेन रोड तक सड़कों पर महिलाओं की भारी भीड़ और नारों से पूरा शहर गूंज उठा। हाथों में तख्तियां और दिल में संकल्प लिए महिलाओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि वे अब अपने अधिकारों को लेकर जागरूक और मुखर हो चुकी हैं।

