रांची विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने शनिवार को आर्यभट्ट सभागार में विश्वविद्यालय के सभी संकायाध्यक्षों, विभागाध्यक्षों और प्राध्यापकों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। पदभार ग्रहण करने के बाद आयोजित इस पहली बड़ी बैठक में उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध गतिविधियों और भविष्य की कार्ययोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक के दौरान कुलपति ने स्पष्ट निर्देश दिया कि विश्वविद्यालय के सभी अंगीभूत और संबद्ध कॉलेजों के लिए एक संयुक्त अकादमिक कैलेंडर तैयार किया जाए, जिसे एक सप्ताह के भीतर विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान उसके शोध कार्यों से होती है, इसलिए शिक्षकों को उच्च स्तरीय शोध में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि छात्रों को वैश्विक स्तर की शिक्षा मिल सके। इसके साथ ही पुराने सिलेबस को तत्काल संशोधित करने और विभागाध्यक्षों को स्वयं पहल कर प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया गया।
तकनीकी सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कुलपति ने विश्वविद्यालय में आईसीटी सेल के गठन को जल्द पूरा करने को कहा। वहीं, पीएचडी गाइड के नियमों में बदलाव करते हुए बताया गया कि जेपीएससी द्वारा स्वीकृत और परिवीक्षा अवधि पूरी कर चुके शिक्षक भी अब पीएचडी गाइड बन सकेंगे।
📘 एनईपी-2020 पर विशेष फोकस
कुलपति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए कहा कि अब वोकेशनल कोर्सेज में भी इसे लागू किया जाएगा। साथ ही, सभी कॉलेजों में एक समान सिलेबस और रूटीन लागू करने पर जोर दिया गया, जबकि माइनर कॉलेजों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार 30% तक बदलाव की छूट दी गई है।
अपने संबोधन में उन्होंने “सा विद्या विमुक्तये” का उल्लेख करते हुए शिक्षा के मूल उद्देश्य को स्पष्ट किया और विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता बताई। साथ ही, आईक्यूएसी डायरेक्टर को नैक रिपोर्ट सभी विभागों में साझा करने का निर्देश दिया गया।
इस बैठक में रजिस्ट्रार डॉ. गुरु चरण साहु, डीएसडब्ल्यू डॉ. सुदेश कुमार साहु, प्रोक्टर डॉ. मुकुंद चंद्र मेहता सहित सभी विभागाध्यक्ष और विश्वविद्यालय के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

