सुदन गुरुंग ने बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी कारोबारी दीपक भट्ट से संबंध होने के आरोप लगे थे। इसके अलावा उनके निवेश और वित्तीय लेनदेन को लेकर भी कई सवाल उठाए जा रहे थे, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई थी।
नेपाल के प्रमुख अखबार कांतिपुर की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुंग ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और हितों के टकराव से बचने के लिए अपने पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने बयान में कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में पद पर बने रहना उचित नहीं होगा और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Facebook पर साझा किए गए अपने पोस्ट में गुरुंग ने लिखा, “मैंने अपने खिलाफ उठे सवालों को गंभीरता से लिया है। मेरे लिए नैतिकता किसी भी पद से बड़ी है और जनता का भरोसा सबसे बड़ी ताकत है।” उनके इस बयान को राजनीतिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के रूप में देखा जा रहा है।
बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में गुरुंग के कथित तौर पर कारोबारी दीपक भट्ट के साथ संबंधों और वित्तीय लेनदेन को लेकर विपक्ष और मीडिया द्वारा लगातार सवाल उठाए जा रहे थे। इन आरोपों के चलते सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा था, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा देकर जांच का रास्ता साफ कर दिया।
यह मामला नेपाल की नई सरकार के लिए चुनौती बनता नजर आ रहा है, क्योंकि एक महीने के भीतर यह दूसरा बड़ा इस्तीफा है। इससे पहले 9 अप्रैल को श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीपक कुमार साह को अनुशासनहीनता के आरोप में पद से हटा दिया गया था। लगातार हो रही इन घटनाओं से सरकार की स्थिरता और कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के मामलों से सरकार की छवि प्रभावित होती है और पारदर्शिता तथा जवाबदेही को लेकर जनता की अपेक्षाएं और बढ़ जाती हैं। अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और सरकार इस पूरे मामले को किस तरह संभालती है।

