रांची: ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उषा मार्टिन फाउंडेशन ने टाटीसिलवे एवं आसपास के 18 गांवों में विशेष पेयजल अभियान चलाकर एक वर्ष के दौरान 35 चापाकलों और 14 जलमीनारों की मरम्मत कर उन्हें पुनः चालू किया है। इस पहल से 1000 से अधिक परिवारों को सीधे तौर पर स्वच्छ पेयजल की सुविधा मिली है।फाउंडेशन के सचिव डॉ. मयंक मुरारी ने बताया कि गर्मी के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट को देखते हुए ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों की मांग पर मरम्मत कार्य शुरू किया गया। अभियान के तहत टाटी पश्चिम, चतरा, उलातू, बहेया, मासू, हेसलजारा, हरातू, चिलदाग, टाटी पूर्वी और अनगड़ा सहित कई गांवों में खराब पड़े चापाकलों एवं जलमीनारों को दुरुस्त किया गया।उन्होंने कहा कि फाउंडेशन का लक्ष्य केवल पेयजल उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ग्रामीणों को स्वच्छता और जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी है। इस पहल के बाद ग्रामीणों को घर के पास ही स्वच्छ पानी मिल रहा है, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है।ग्रामीण महिलाओं ने भी इस पहल का स्वागत किया है। ग्रामीण अंजनी देवी ने बताया कि पहले उन्हें एक से दो किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता था, जबकि अब घर के नजदीक ही स्वच्छ पानी उपलब्ध है। वहीं महिला समूह की सदस्य रूबी देवी ने कहा कि पानी की सुविधा मिलने से महिलाओं को बड़ी राहत मिली है और वे अन्य कार्यों पर अधिक समय दे पा रही हैं।उषा मार्टिन फाउंडेशन की यह पहल ग्रामीण विकास, सामुदायिक सहभागिता और जल संरक्षण के क्षेत्र में एक सफल उदाहरण बनकर उभरी है। इससे न केवल पेयजल संकट कम हुआ है, बल्कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।

