तीन मासूम लापता… हर गुजरता पल बढ़ा रहा परिवार की बेचैनी

डकरा के सुभाष नगर से बच्चों के गायब होने पर कोयलांचल से भावुक अपील— “आपकी एक सूचना लौटा सकती है किसी घर की खुशियां”

खलारी। डकरा के सुभाष नगर से तीन मासूम बच्चों के लापता होने की घटना ने पूरे कोयलांचल को चिंता में डाल दिया है। जिन घरों में कुछ दिन पहले तक बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब हर आहट पर उम्मीद और हर गुजरते पल के साथ बेचैनी बढ़ती जा रही है। परिजन अपनों की सलामती की दुआ कर रहे हैं, वहीं लापता हेल्प डेस्क टीम ने पूरे क्षेत्र के लोगों से बच्चों की तलाश में आगे आने की मार्मिक अपील की है।लापता हेल्प डेस्क टीम के सदस्य मुन्नु शर्मा ने बताया कि लापता बच्चों में शिवा कुमार (10 वर्ष), पिता अशर्फी भुईयांमेधा कुमारी (6 वर्ष), पिता सुनील भुईयां तथा मंगल उरांव उर्फ टकला (9 वर्ष), पिता महेश उरांव शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन तीनों बच्चों की तलाश में समाज के हर वर्ग का सहयोग अत्यंत आवश्यक है।मुन्नु शर्मा ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का नैतिक दायित्व है। अक्सर रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, बाजार, चौक-चौराहों या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर अकेले भटकते बच्चों को लोग सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि संभव है कि वही बच्चा किसी संकट में हो, अपने परिवार से बिछड़ गया हो या मदद का इंतजार कर रहा हो।उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कहीं भी कोई बच्चा संदिग्ध परिस्थिति में दिखाई दे या इन तीनों बच्चों के संबंध में कोई भी जानकारी मिले, तो उसे अनदेखा न करें। तत्काल नजदीकी पुलिस थाना या लापता हेल्प डेस्क को सूचना दें। आपकी एक छोटी-सी सतर्कता किसी मासूम को सुरक्षित उसके परिवार तक पहुंचाने का माध्यम बन सकती है।उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि समाज इस मुद्दे को केवल एक घटना नहीं, बल्कि प्रिवेंटिव एक्शन के रूप में ले। यदि हर नागरिक जागरूक रहेगा तो न केवल गुमशुदा बच्चों का जल्द पता लगाया जा सकेगा, बल्कि बच्चों के साथ होने वाली कई संभावित घटनाओं को भी समय रहते रोका जा सकेगा।लापता हेल्प डेस्क टीम ने सहायता एवं सूचना के लिए 8409345279 हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। टीम ने कोयलांचलवासियों से अपील की है कि इन तीनों बच्चों के संबंध में कोई भी सूचना मिलने पर तुरंत इस नंबर या नजदीकी पुलिस को सूचित करें।

अपील

तीन मासूम आज अपने घरों से दूर हैं। हो सकता है वे आपके आसपास हों और मदद का इंतजार कर रहे हों। आपकी एक नजर, एक फोन कॉल और थोड़ी-सी संवेदनशीलता किसी मां की सूनी आंखों में फिर से खुशी के आंसू ला सकती है।

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