रांची: वन्यजीव संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता और जनभागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, झारखंड सरकार द्वारा ‘वन्यजीव सप्ताह, 2026’ के तहत भव्य वॉकाथॉन का आयोजन किया गया। इस आयोजन में लगभग 2,500 से 3,000 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण का संकल्प दोहराया।
वॉकाथॉन का शुभारंभ वन भवन परिसर में रंग-बिरंगे गुब्बारे उड़ाकर और हस्ताक्षर अभियान के साथ किया गया। इसमें स्कूली विद्यार्थियों, युवाओं, विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों, विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों और प्रकृति प्रेमियों ने बढ़-चढ़कर शिरकत की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं हेड ऑफ फोर्स संजीव कुमार (आईएफएस) ने कहा कि वन्यजीव हमारे वनों, प्राकृतिक संतुलन और स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का मजबूत आधार हैं। वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवासों का संरक्षण केवल आज के लिए ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संरक्षण के इस प्रयास को एक जन-आंदोलन का रूप देना जरूरी है, जिसमें युवाओं और विद्यार्थियों की भागीदारी सबसे अहम है। उन्होंने नागरिकों से पर्यावरण-अनुकूल आदतों को अपनी दैनिक जीवनशैली में शामिल करने की अपील की।
वहीं, पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ एवं मुख्य वाइल्डलाइफ वार्डन रवि रंजन (आईएफएस) ने झारखंड की समृद्ध वन संपदा और जैव-विविधता को राज्य की अमूल्य धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि प्रकृति, वन और वन्यजीव आपस में गहराई से जुड़े हैं। वन्यजीवों की सुरक्षा केवल सरकार या विभाग का दायित्व नहीं, बल्कि हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। इस वॉकाथॉन का मुख्य उद्देश्य इसी उत्तरदायित्व की भावना को जन-जन तक पहुंचाना है।
अधिकारियों के संबोधन के बाद प्रतिभागियों ने वन भवन से अपनी पदयात्रा शुरू की। यह पदयात्रा अरगोड़ा, बिरसा चौक और हिनू होते हुए पुनः वन भवन पहुंचकर संपन्न हुई। पूरे मार्ग के दौरान प्रतिभागियों ने नारों और तख्तियों के माध्यम से आम जनता को जैव-विविधता व पर्यावरण की रक्षा का संदेश दिया।
