हजारीबाग: समुदाय के अंतिम व्यक्ति तक मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने और आत्महत्या के जोखिम की समय पर पहचान व रोकथाम को सशक्त बनाने के उद्देश्य से सोमवार को सदर अस्पताल, हजारीबाग में विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम केंद्रीय मनश्चिकित्सा संस्थान (CIP), कांके, रांची के मनोरोग समाज कार्य विभाग (Department of Psychiatric Social Work) द्वारा संचालित परियोजना के तहत आयोजित हुआ। कार्यशाला सीआईपी के निदेशक डॉ. वी.के. चौधरी के मार्गदर्शन में संपन्न हुई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हजारीबाग के सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार उपस्थित रहे। इसके अलावा जिला कुष्ठ निवारण पदाधिकारी (DLO) डॉ. एस.के. राजन, सीआईपी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सह सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव तथा सह-परियोजना निदेशक सह वरिष्ठ मनोरोग अधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह ने भी शिरकत कर स्वास्थ्यकर्मियों का मार्गदर्शन किया।
प्रशिक्षण के दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (CHWs) को मानसिक स्वास्थ्य की मूलभूत अवधारणाओं, सामान्य विकारों के लक्षणों की पहचान, सामाजिक भ्रांतियों व कलंक (Stigma) को दूर करने के उपायों से अवगत कराया गया। इसके साथ ही आत्महत्या के पूर्व चेतावनी संकेतों की पहचान, संकट के समय प्राथमिक सहायता और समय पर उच्च स्वास्थ्य केंद्रों में रेफर करने की व्यावहारिक जानकारी दी गई, ताकि जमीनी स्तर पर स्वास्थ्यकर्मी जरूरतमंदों को तत्काल सहायता उपलब्ध करा सकें।
इस अवसर पर ‘विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह 2026’ का विधिवत शुभारंभ भी किया गया। इस वर्ष की थीम “Lived Experiences Heard, Real Voices, Real Change” तय की गई है। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि मानसिक स्वास्थ्य केवल बीमारी का न होना भर नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कल्याण से जुड़ा पहलू है। मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक मानवीय, संवेदनशील और समावेशी बनाने के लिए पीड़ितों के वास्तविक अनुभवों को सुनना और समझना बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम के समापन पर अधिकारियों ने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में संवेदनशील और कलंक-मुक्त वातावरण तैयार करने के लिए सामूहिक भागीदारी का आह्वान किया।
