रांची (बिभा): डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) में आज लरका आंदोलन के प्रणेता एवं महान स्वतंत्रता सेनानी वीर बुधु भगत की 234वीं जयंती आदिवासी छात्र संघ के नेतृत्व में धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आदिवासी छात्र संघ के इकाई अध्यक्ष विवेक तिर्की ने की। इस अवसर पर वीर बुधु भगत के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित वक्ताओं ने उनके संघर्षों और बलिदान को याद करते हुए कहा कि वीर बुधु भगत ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ लरका आंदोलन का नेतृत्व किया और छोटानागपुर क्षेत्र में आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किया। उनका आंदोलन जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए आदिवासियों की चेतना का प्रतीक था।
कार्यक्रम में डीएसपीएमयू के छात्र कल्याण अधिष्ठाता (DSW) डॉ. सर्वोत्तम कुमार ने कहा कि वीर बुधु भगत सिर्फ एक क्रांतिकारी नहीं थे, बल्कि वे आदिवासी समाज के हक-अधिकार के संरक्षक और प्रेरणास्रोत थे। उन्होंने जल, जंगल, जमीन और आदिवासी स्वाभिमान की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके संघर्ष से आज की युवा पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
डॉ. सर्वोत्तम कुमार ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय के सभी प्रवेशद्वारों का नामकरण जल्द ही जनजातीय शहीदों के नाम पर किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ी अपने इतिहास और नायकों से प्रेरणा ले सके।
इस कार्यक्रम में आदिवासी छात्र संघ के सचिव अमित टोप्पो, दिनेश उराँव, सीमा मुर्मू, लालेश्वर उराँव, अजीत महतो, अंशु टोप्पो, गौरव वर्मा, मनीष मुंडा, उमेश उराँव सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं कर्मचारी भी मौजूद थे।
कार्यक्रम का समापन वीर बुधु भगत के आदर्शों को आत्मसात करने और आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करने के संकल्प के साथ किया गया।
