
झारखंड विधानसभा के रजत जयंती समारोह ने शनिवार को राजधानी रांची को एक गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनाया। राज्य की 25 वर्ष की लोकतांत्रिक यात्रा, उसकी संघर्षशील राजनीतिक विरासत और जनहित के संकल्पों को याद करते हुए विधानसभा परिसर में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। समारोह दो सत्रों में सम्पन्न हुआ, जिसमें राज्य के शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यपाल संतोष गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, और विधानसभा अध्यक्ष रविन्द्र नाथ महतो ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर रजत जयंती कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की। मंच पर उपस्थित इन नेताओं ने झारखंड की 25 वर्षीय यात्रा, चुनौतियों और उपलब्धियों पर अपने विचार व्यक्त किए। राज्यपाल गंगवार ने इसे “लोकतांत्रिक चेतना का उत्सव” बताते हुए कहा कि झारखंड की विधान परंपरा लगातार परिपक्व और मजबूत हो रही है।
‘उत्कृष्ट विधायक’ राज सिन्हा को मिला सम्मान
समारोह के दौरान सबसे विशेष क्षण वह था, जब धनबाद के भाजपा विधायक राज सिन्हा को ‘उत्कृष्ट विधायक पुरस्कार’ प्रदान किया गया। विधानसभा अध्यक्ष महतो और मुख्यमंत्री सोरेन ने संयुक्त रूप से यह सम्मान सौंपा।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन में कहा—
“झारखंड ने 25 वर्षों में पहचान, संघर्ष और विकास की लंबी यात्रा तय की है। समाज में परिवर्तन किसी जादुई छड़ी से नहीं आता, बल्कि निरंतर प्रयास और संकल्प से आता है। ऐसे विधायकों का सम्मान लोकतंत्र को मजबूत बनाता है।”
राज सिन्हा ने सम्मान स्वीकार करते हुए कहा कि यह पुरस्कार जनता की सेवा और जनसरोकारों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।
शहीद जवानों के परिवारों को श्रद्धांजलि, भावुक हुआ समारोह
रजत जयंती आयोजन का सबसे मार्मिक हिस्सा था 16 शहीद जवानों के आश्रितों को सम्मान।
शहीदों के परिजनों को मंच पर बुलाकर राज्य सरकार ने न सिर्फ उन्हें सम्मानित किया, बल्कि उनकी बलिदानी गाथा को भी नमन किया। पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा और वातावरण एक क्षण के लिए भावुक हो गया। नेताओं ने कहा कि शहीदों की कुर्बानी हमारे राज्य और देश की अस्मिता की रक्षा का प्रतीक है।
राज्य की भविष्य यात्रा के लिए संकल्प
विधानसभा अध्यक्ष महतो ने कहा कि रजत जयंती सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए “नए लक्ष्य निर्धारित करने का समय” है।
उन्होंने कहा—
“झारखंड की लोकतांत्रिक यात्रा अभी अधूरी है। हमें पारदर्शिता, सुशासन और विकास के नए आयाम तय करने होंगे।”
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों को स्मृति-चिह्न भेंट किया गया और राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ।
