झारखंड में 01 से 17 जून तक लक्ष्य के मुकाबले 57 प्रतिशत कम बारिश दर्ज

झारखंड के कई जिलों में सूखा जैसी स्थिति,18–19 जून को ऑरेंज अलर्ट जारी

रांची। झारखंड में मानसून के आगमन के बावजूद राज्य में बारिश सामान्य से काफी कम दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, 01 जून से 17 जून के बीच राज्य में औसतन 57 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जिससे कई जिलों में सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं।

मौसम विभाग के अनुसार, इस अवधि में राज्य में केवल 29.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य रूप से 67 प्रतिशत बारिश होनी चाहिए थी। बारिश की कमी के चलते राज्य में तापमान बढ़ने लगा है और गर्मी का असर एक बार फिर तेज हो गया है।

आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में सबसे अधिक बारिश राजधानी रांची में दर्ज की गई है, जहां औसत लक्ष्य के मुकाबले 86.4 प्रतिशत वर्षा हुई है। रांची को छोड़कर राज्य के लगभग सभी जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।

वहीं, गढ़वा और चतरा जिले में स्थिति सबसे गंभीर बताई जा रही है, जहां 01 से 17 जून के बीच लगभग नाममात्र या बिल्कुल बारिश नहीं हुई है। मौसम विभाग के अनुसार गढ़वा में इस अवधि में 39.5 प्रतिशत और चतरा में 51.4 मिलीमीटर के आसपास बारिश अपेक्षित थी, लेकिन वास्तविक स्थिति काफी कमजोर रही।

इधर मौसम विभाग ने 18 और 19 जून को राज्य के पूर्वी और मध्यवर्ती जिलों में गरज के साथ बारिश, आकाशीय बिजली और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई है। इस दौरान हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जिसके चलते ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

बारिश की कमी और बढ़ते तापमान के कारण पूरे राज्य में भीषण गर्मी और उमस का असर बढ़ गया है। पिछले 24 घंटों में डाल्टनगंज में अधिकतम तापमान 42.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो राज्य में सर्वाधिक रहा, जबकि लातेहार में न्यूनतम तापमान 22.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

अन्य प्रमुख शहरों में जमशेदपुर में अधिकतम तापमान 39.2 डिग्री, बोकारो में 39.2 डिग्री और चाईबासा में 39.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। राजधानी रांची में बुधवार को अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री और न्यूनतम 24.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ।

मौसम विभाग ने कहा है कि आने वाले दिनों में बारिश होने से तापमान में थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन फिलहाल उमस और गर्मी से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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