अकादमिक सत्र की परीक्षाएं,नए सत्र में नामांकन और विश्वविद्यालय के विस्तारीकरण को सुनिश्चित करें – कुलपति डॉ राजीव मनोहर

कुलपति डॉ राजीव मनोहर ने सभी संकायों के डीन, विभागाध्यक्षों और समन्वयकों के साथ समीक्षा बैठक की।

दिनांक 20 अप्रैल को अपराह्न 3 बजे डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ राजीव मनोहर ने विश्वविद्यालय के गांधी सभागार में सभी संकायों के डीन, विभागाध्यक्षों और समन्वयकों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्वेश्य पूर्व में लिए गए सामूहिक निर्णयों और लक्ष्यों के क्रियान्वयन से संबंधित था। कुलपति डॉ राजीव मनोहर ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए शुरुआत में ही पूर्व में सूचीबद्ध कार्यों के संबंध में संकायों के डीन, विभागाध्यक्षों और समन्वयकों से पूर्ण जानकारी प्राप्त की। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित की जानेवाली आगामी परिक्षाओं, विभागीय स्तर पर नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने विशेष तौर पर सभी विभागाध्यक्षों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि आगामी परीक्षाओं को ध्यानगत रखते हुए स्नातक के पाठ्यक्रमों को प्राथमिकता के आधार अवश्य पूरा कर लिया जाए ताकि उपरोक्त परीक्षाएं समय से आयोजित कर सत्र को नियमित किया जा सके। उन्होंने इस हेतु सभी विभागाध्यक्षों और समन्वयकों को विशेष ऑनलाइन कक्षाओं को आयोजित करने को कहा। उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि विश्वविद्यालय की एक प्राथमिकता यह भी है कि बैकलॉग परिक्षाओं का निष्पादन विद्यार्थियों के हित में तत्काल किया जाए। इस हेतु उन्होंने प्रत्येक विभाग से एक समन्वयक को परीक्षा विभाग से तारतम्य स्थापित कर इस प्रक्रिया को सरल और व्यवहारिक करने की बात कही। उन्होंने आगे कहा कि परीक्षा सत्र के नियमित होने के उपरांत सभी संकाय के डीन यह सुनिश्चित करें कि नए सत्र की नामांकन प्रक्रिया और वर्ग संचालन समय से प्रारंभ हो सके। कुलपति डॉ राजीव मनोहर ने कहा कि विश्वविद्यालय की पहचान उसकी शैक्षणिक निरंतरता के साथ साथ शोध कार्यों से भी होती है। अतः संस्थान के विस्तारीकरण के लिए यह आवश्यक है कि विश्वविद्यालय अन्य समकक्ष शैक्षणिक संस्थानों के साथ MOU की प्रक्रिया के द्वारा संसाधनों का आदान प्रदान करें ताकि दोनों संस्थान एक दूसरे के परस्पर सहयोग के द्वारा उत्तरोत्तर प्रगति करें। कुलपति डॉ राजीव मनोहर ने बताया कि जल्द ही विश्वविद्यालय NAAC के आगमन की तैयारी में जुटेगा और इस संदर्भ में विश्वविद्यालय डिजिटल मोड को और अधिक उपयोगी और प्रासंगिक बनाने की दिशा में पहल करेगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विभाग से एक प्रारूप के तहत संपूर्ण विभागीय जानकारी मांगी गई है ताकि विभागों की मूलभूत समस्याओं को चिन्हित कर उनका निराकरण किया जा सके। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय की पहचान शोध और अनुसंधान से होती है अतः इस दिशा में उनका पूरा प्रयास और सहयोग विश्वविद्यालय परिवार को प्राप्त होगा। इस बैठक में डीएसडब्ल्यू डॉ सर्वोत्तम कुमार, कुलसचिव डॉ धनंजय वासुदेव द्विवेदी, परीक्षा नियंत्रक शुचि संतोष बरवार, सभी संकायों के डीन, विभागाध्यक्ष, निदेशक और समन्वयक मौजूद थे।यह जानकारी पीआरओ डॉ राजेश कुमार सिंह ने दी।

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