DSPMU में ‘कंप्यूटर टेक्नोलॉजी’ पुस्तक का लोकार्पण, कुलपति बोले— पुस्तकों का प्रकाशन विश्वविद्यालय का प्रतिबिंब

रांची: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU), रांची में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक कार्यक्रम के तहत विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजीव मनोहर ने कुलपति कक्ष में ‘कंप्यूटर टेक्नोलॉजी’ (Computer Technology) पुस्तक का लोकार्पण किया। यह पुस्तक विश्वविद्यालय के शिक्षकों द्वारा सामूहिक रूप से लिखी गई है, जो नई शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप विद्यार्थियों के लिए उपयोगी अध्ययन सामग्री के रूप में तैयार की गई है।

इस पुस्तक का संयुक्त लेखन डॉ. राहुल देव साह, डॉ. राजेंद्र कुमार महतो और डॉ. आई. एन. साहू ने किया है। तीनों लेखकों ने अपने शैक्षणिक अनुभव, विषयगत समझ और तकनीकी विशेषज्ञता को पुस्तक में समाहित किया है। यह पुस्तक विशेष रूप से झारखंड सरकार की नई शिक्षा नीति (NEP) के अंतर्गत संचालित ‘स्किल एन्हांस्ड कोर्स’ (SEC) के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

पुस्तक की खास बात यह है कि इसमें जटिल तकनीकी विषयों को ‘प्रश्न-उत्तर’ प्रारूप में सरल और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत किया गया है, जिससे विद्यार्थियों को न केवल विषय को समझने में मदद मिलेगी, बल्कि परीक्षा में उत्तर लिखने की शैली को भी बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।

इस अवसर पर कुलपति डॉ. राजीव मनोहर ने कहा,
“पुस्तकों का प्रकाशन किसी भी विश्वविद्यालय का प्रतिबिंब होता है। यह हमारे विश्वविद्यालय के लिए गर्व का क्षण है। अक्सर छात्र नई शिक्षा नीति के अंतर्गत शुरू हुए नए पाठ्यक्रमों के लिए प्रमाणिक अध्ययन सामग्री की कमी महसूस करते थे। यह पुस्तक न केवल उस कमी को पूरा करेगी, बल्कि विद्यार्थियों के लिए अधिक प्रासंगिक और उपयोगी सिद्ध होगी। साथ ही यह उन्हें परीक्षाओं और शोध कार्य के लिए भी बेहतर रूप से तैयार करेगी।”

उन्होंने इस प्रयास को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक संस्कृति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और शिक्षक उपस्थित रहे। मौके पर मुख्य रूप से कुलसचिव डॉ. धनंजय बासुदेव द्विवेदी, परीक्षा नियंत्रक डॉ. संतोष शुचि बरवार, सामाजिक संकायाध्यक्ष डॉ. एस. एम. अब्बास, वित्त पदाधिकारी डॉ. अनीता मेहता, प्रॉक्टर डॉ. राजेश कुमार सिंह तथा डॉ. अनुपम कुमार उपस्थित थे।

विश्वविद्यालय परिवार ने इस पुस्तक को विद्यार्थियों के लिए एक उपयोगी शैक्षणिक संसाधन बताते हुए इसके प्रकाशन को ज्ञान, शोध और कौशल-आधारित शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना है।

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