“महिला उद्यमिता आत्मनिर्भरता की पहचान, हुनर और तकनीक के साथ आगे बढ़ें महिलाएं” : संतोष गंगवार
हजारीबाग। श्री राम जानकी मठ, बड़ा अखाड़ा ठाकुरबाड़ी परिसर में 17 से 24 अगस्त तक आयोजित आठ दिवसीय जनजातीय गौरव उत्सव-2026 का सोमवार को भव्य समापन हुआ। बिरसा मुंडा जन कल्याण योजना प्रचार अभियान, झारखंड की ओर से आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार एवं विशिष्ट अतिथि पूर्व सांसद, पलामू ब्रजमोहन राम शामिल हुए। अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का विधिवत शुभारंभ किया। राज्यपाल के आगमन से समापन समारोह विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। समापन समारोह से पूर्व राज्यपाल ने उत्सव परिसर में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों एवं प्रदर्शनी का भ्रमण किया। उन्होंने जनजातीय, महिला एवं स्थानीय उद्यमियों के उत्पादों का अवलोकन किया तथा उद्यमियों से संवाद कर उनके कार्यों की सराहना की। उत्सव में पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और झारखंड सहित विभिन्न राज्यों से आए कारीगरों एवं महिला उद्यमियों ने करीब 70 स्टॉल लगाए थे। इनमें महिलाओं द्वारा तैयार कपड़े, अचार, हस्तशिल्प, सजावटी सामान, घरेलू उपयोग की वस्तुएं तथा पारंपरिक उत्पाद लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। समारोह में उत्कृष्ट महिला एवं जनजातीय उद्यमियों के आठ समूहों को सम्मानित किया गया। राज्यपाल का आयोजन समिति की ओर से अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिह्न देकर स्वागत किया गया। मंच पर राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान के बाद अतिथियों का सम्मान किया गया।
अपने संबोधन में राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा कि इस तरह के आयोजन महिलाओं को अपने हुनर और उत्पादों को बड़े मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करते हैं। महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प का महत्वपूर्ण हिस्सा है। महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करने वाले ऐसे आयोजन आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हजारीबाग में आयोजित जनजातीय गौरव उत्सव महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि जनजातीय गौरव उत्सव केवल मेला नहीं, बल्कि विभिन्न राज्यों को जोड़ने और देश की सांस्कृतिक विरासत को बाजार से जोड़ने का माध्यम है। हथकरघा और हस्तशिल्प के उत्पाद केवल वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही कला, परंपरा और संस्कृति की पहचान हैं। महिलाओं की उद्यमिता केवल परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक रूप से सशक्त बनने और समाज में अपनी पहचान बनाने का माध्यम भी है। राज्यपाल ने कहा कि बदलते बाजार के अनुरूप गुणवत्ता और नई तकनीक पर ध्यान देना जरूरी है। कौशल के साथ तकनीक का इस्तेमाल कर उद्यमी बाजार में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘लोकल के लिए वोकल’ अभियान से जुड़कर महिलाएं विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठा सकती हैं। उन्होंने कहा कि योजनाएं बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना लक्ष्य होना चाहिए। युवाओं को भी कौशल विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है।
पूर्व सांसद ब्रजमोहन राम ने भी समारोह को संबोधित करते हुए जनजातीय संस्कृति, परंपरा और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए ऐसे आयोजनों को महत्वपूर्ण बताया। आयोजकों ने कहा कि आठ दिवसीय उत्सव महज एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि झारखंड की जनजातीय संस्कृति, परंपरा, विरासत और महिला उद्यमिता को देश के विभिन्न राज्यों से जोड़ने का प्रयास रहा। अलग-अलग राज्यों से आई महिला उद्यमियों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और अपने हुनर को व्यवसाय से जोड़ने का अवसर मिला। इससे ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना भी मजबूत हुई। समापन समारोह में राष्ट्रीय अभियान प्रमुख राजमणि, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार, झारखंड प्रदेश अध्यक्ष राम किशोर सावंत, सचिव सुमन देमता, मुख्य संरक्षक विनोद कुमार सहित आयोजन समिति के सदस्यों के प्रयासों की सराहना की गई। महिला आयोजन समिति की पूनम मिश्रा, मरियम टुड्डू, मंजू मिश्रा, सीमा, डॉ. गौतम तथा हजारीबाग आर्ट एंड कल्चरल ट्रस्ट की सांस्कृतिक टीम का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम का मंच संचालन आर्ट एंड कल्चरल ट्रस्ट के तरंग ग्रुप के निदेशक अमित गुप्ता एवं ट्रस्ट के सचिव प्रदीप पाठक ने किया। आयोजन को सफल बनाने में मीडिया प्रभारी प्रदीप पाठक, मीडिया टीम, स्वयंसेवकों, प्रबंधन टीम तथा भोजन, आवास और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समापन के दौरान ठाकुरबाड़ी मंदिर परिसर में जनजातीय संस्कृति, महिला सशक्तीकरण और उद्यमिता का अनूठा संगम देखने को मिला। आयोजकों ने कहा कि यह समापन यात्रा का अंत नहीं, बल्कि जनजातीय कला, संस्कृति, विरासत और महिला उद्यमिता को देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने की नई शुरुआत है।

