नई दिल्ली। दीपावाली से पहले धनतेरस पर देशभर के बाजारों में जमकर खरीदारी हुई। सोने-चांदी के आभूषणों से लेकर मोबाइल, टीवी, कपड़े, मिठाइयां और सजावट के सामान की खूब बिक्री हुई। इस बार दिल्ली में कारोबार एक लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर गया। देशभर में दीपावली से जुड़ा कारोबार 6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुका है।
कारोबारियों के संगठन कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने शनिवार को एक बयान में अनुमान जताया कि दीपावली पर खरीदारी का यह आंकड़ा बढ़कर 7 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। कैट ने दिल्ली के व्यापारियों की ओर से दिल्लीवासियों का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दिल्ली की जनता ने इस बार दीपावली की खरीदारी में जिस उत्साह, विश्वास और बड़ी संख्या में बाजारों में पहुंचकर भागीदारी की है। वह दिल्ली के व्यापारिक समुदाय के लिए अत्यंत उत्साहवर्धक है।
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री एवं सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि दिल्लीवासियों ने बाजारों में उमड़कर न केवल व्यापारियों की आर्थिक गतिविधियों को नई गति दी है, बल्कि राहुल गांधी की एक नवंबर की रैली तथा पिछले एक महीने से दिल्ली में चल रहे धरनों, प्रदर्शनों और आंदोलनों के कारण व्यापार को हुए भारी नुकसान के बीच एक सकारात्मक और प्रभावशाली संदेश भी दिया है।
खंडेलवाल ने कहा कि धन्यवाद दिल्ली केवल एक नारा नहीं, बल्कि दिल्ली के करोड़ों व्यापारियों, दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों, दिहाड़ी मजदूरों और छोटे उद्यमियों की ओर से दिल्ली की जनता के प्रति कृतज्ञता की सच्ची अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि दिल्लीवासियों ने बाजारों में पहुंचकर यह साबित कर दिया है कि वे त्योहारों की खुशियों, आर्थिक गतिविधियों और व्यापारिक जीवन को किसी भी राजनीतिक व्यवधान के कारण रुकने नहीं देना चाहते।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और अन्य आंदोलनकारियों को दिल्ली की जनता ने अपने व्यवहार और बाजारों में की गई जबरदस्त खरीदारी से करारा जवाब दिया है। लोकतंत्र में विरोध और प्रदर्शन का अधिकार सभी को है, लेकिन किसी भी राजनीतिक गतिविधि के कारण आम नागरिकों की आवाजाही, व्यापारियों की आजीविका और लाखों परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित नहीं होनी चाहिए। दिल्ली की जनता ने इस दिवाली पर व्यापार, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के पक्ष में अपनी स्पष्ट भावना व्यक्त की है।
खंडेलवाल ने बताया कि अब तक दिल्ली में दिवाली का कुल व्यापार एक लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है, जबकि देशभर में दीपावली से संबंधित कारोबार 6 लाख करोड़ रुपये रुपये से अधिक हो गया है। बाजारों में ग्राहकों की लगातार बढ़ती भीड़ और खरीदारी के उत्साह को देखते हुए यह आंकड़ा 7 लाख करोड़ रुपये के कारोबार को पार करेगा।
उन्होंने कहा कि इस बार बाजारों में एक विशेष परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। ग्राहक भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और स्वदेशी अपनाने के आह्वान का व्यापक प्रभाव बाजारों में दिखाई दे रहा है। भारतीय कारीगरों, निर्माताओं, छोटे उद्योगों और स्थानीय उद्यमियों के उत्पादों को ग्राहकों का भरपूर समर्थन मिल रहा
खंडेलवाल ने कहा क इस वर्ष दिवाली की खरीदारी में अनेक श्रेणियों में जबरदस्त मांग देखी जा रही है। इनमें प्रमुख हैं जिसमें सोना, चांदी एवं आभूषण: सोने के आभूषण, चांदी के सिक्के, मूर्तियां और हल्के वजन के आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं घरेलू उपकरण: मोबाइल फोन, एलईडी टीवी, रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन, एयर कंडीशनर और अन्य घरेलू उपकरण, कपड़े एवं फैशन: साड़ियां, सूट, कुर्ते, रेडीमेड गारमेंट्स, बच्चों के कपड़े और पारंपरिक परिधान, पूजा एवं सजावटी सामग्री: मिट्टी के दीये, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, पूजा थालियां, बंदनवार, रंगोली, मोमबत्तियां और लाइटिंग, मिठाइयां एवं खाद्य पदार्थ: पारंपरिक मिठाइयां, ड्राई फ्रूट्स, नमकीन, चॉकलेट, गिफ्ट पैक और खाद्य सामग्री, फर्नीचर एवं घरेलू साज-सज्जा: फर्नीचर, होम डेकोर, किचनवेयर, बर्तन और फर्निशिंग उत्पाद, खिलौने एवं उपहार: भारतीय खिलौने, बच्चों के उत्पाद, कॉरपोरेट गिफ्ट और पारंपरिक उपहार सामग्री, ऑटोमोबाइल एवं दोपहिया वाहन: कारों, स्कूटरों, मोटरसाइकिलों तथा व्यावसायिक वाहनों की खरीद में भी उत्साह दिखाई दे रहा है, हस्तशिल्प एवं स्वदेशी उत्पाद: खादी, हथकरघा, हस्तनिर्मित सजावटी वस्तुएं, स्थानीय कारीगरों के उत्पाद और महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार वस्तुएं प्रमुख हैं
कैट ने कहा कि दिवाली के इस बड़े व्यापार से छोटे और मझोले व्यापारी, रेहड़ी-पटरी वाले, दिहाड़ी मजदूर, लघु एवं कुटीर उद्योग, स्वयं सहायता समूह, महिला उद्यमी, कारीगर, परिवहन व्यवसायी, पैकेजिंग उद्योग, लॉजिस्टिक्स, डिलीवरी सेवाएं और घरेलू उत्पादन से जुड़े लाखों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से बड़ा आर्थिक लाभ मिल रहा है।
विशेष रूप से महिला स्वयं सहायता समूहों, महिला उद्यमियों, स्थानीय कारीगरों और छोटे निर्माताओं को अपने उत्पादों के लिए व्यापक बाजार उपलब्ध हो रहा है। इससे रोजगार सृजन के साथ-साथ स्थानीय उत्पादन और पारिवारिक आय को भी मजबूती मिल रही है।
खंडेलवाल ने कहा कि दिल्ली के व्यापारियों को पिछले एक महीने में राजनीतिक रैलियों, धरनों और प्रदर्शनों के कारण जिस प्रकार की आर्थिक कठिनाइयों और व्यापारिक नुकसान का सामना करना पड़ा, उसकी भरपाई केवल कुछ दिनों की खरीदारी से पूरी तरह संभव नहीं है। फिर भी दिल्लीवासियों ने बाजारों में जिस उत्साह के साथ खरीदारी की है, उससे व्यापारियों का मनोबल बढ़ा है और उन्हें एक नई उम्मीद मिली है।
उन्होंने दिल्ली के सभी नागरिकों से अपील की कि वे आने वाले त्योहारों पर भी स्थानीय बाजारों से खरीदारी करें, भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दें और अपने शहर के छोटे व्यापारियों, दुकानदारों, कारीगरों एवं उद्यमियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में योगदान दें।
खंडेलवाल ने कहा कि दिल्ली का व्यापारी केवल सामान नहीं बेचता, बल्कि लाखों परिवारों की आजीविका चलाता है। बाजारों की रौनक ही शहर की आर्थिक शक्ति है। इस दिवाली दिल्लीवासियों ने व्यापार, रोजगार, स्वदेशी और आर्थिक एकजुटता के पक्ष में जो विश्वास दिखाया है, उसके लिए दिल्ली के व्यापारी समाज की ओर से प्रत्येक नागरिक को हमारा दिल से धन्यवाद।

