रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के एमएमडीआर संशोधन बिल के समर्थन में दिए गए बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा पर राज्य के संवैधानिक और वित्तीय अधिकार को कमजोर करने वाले कानून को राज्यहित में बताना जनता को गुमराह करने की कोशिश है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने बुधवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि रघुवर दास को पहले यह बताना चाहिए कि उनके शासनकाल में झारखंड की खनिज संपदा से राज्य और जनता को कितना वास्तविक लाभ मिला। साथ ही, यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि खनन प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति में अपेक्षित बदलाव क्यों नहीं आया।
उन्होंने कहा कि भाजपा को यदि झारखंड की खनिज संपदा से वास्तव में इतनी ही चिंता है तो उसे स्पष्ट करना चाहिए कि एमएमडीआर संशोधन के बाद राज्यों के अधिकार, खनिज-युक्त भूमि उपकर और खनिज राजस्व की सुरक्षा की ठोस गारंटी क्या है। केवल यह कहना कि 90 प्रतिशत भुगतान राज्यों को मिलता है, वास्तविक सवाल का जवाब नहीं है। असली सवाल यह है कि केंद्र सरकार कानून बनाकर राज्यों के राजस्व अधिकार और नीति-निर्धारण की क्षमता को सीमित क्यों करना चाहती है।
केशव महतो कमलेश ने रघुवर दास के पारदर्शी लीगल माइनिंग के दावे पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि रघुवर दास को अपने कार्यकाल का भी आकलन करना चाहिए और बताना चाहिए कि उस दौरान खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के हित में क्या ठोस कदम उठाए गए।
उन्होंने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा न तो भाजपा की निजी संपत्ति है और न ही केंद्र सरकार की। यह झारखंड की जनता, आदिवासियों और मूलवासियों की प्राकृतिक संपदा है। इसके दोहन से प्राप्त राजस्व का इस्तेमाल राज्य के विकास और आम लोगों के कल्याण में होना चाहिए।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि खनिज संपदा से मिलने वाले राजस्व को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और खनन प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास पर खर्च किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन ऐसा हो, जिससे उसका वास्तविक लाभ राज्य और यहां की जनता को मिले, न कि उनके अधिकार और राजस्व हित कमजोर हों।

