गुमला। डिजिटल दौर में लुप्त होती पत्र-लेखन की परंपरा को जीवित रखने और नई पीढ़ी को इससे जोड़ने की एक अनूठी पहल गुमला में देखने को मिली। रक्षाबंधन के पावन पर्व के उपलक्ष्य में ‘बाल पाठशाला प्ले स्कूल’ के नन्हे बच्चों ने अपने हाथों से राखियां तैयार कीं, संदेश लिखे और उन्हें परिजनों तक पहुंचाने के लिए गुमला मुख्य डाकघर पहुंचे।
पहली बार लेटर बॉक्स में डाले पत्र
विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं के साथ डाकघर पहुंचे इन बच्चों ने पहली बार सार्वजनिक पत्रपेटी (लेटर बॉक्स) में अपने लिफाफे डाले। नन्हे-मुन्ने बच्चों के इस उत्साह को देखकर डाकघर का माहौल खुशनुमा हो गया। डाक कर्मचारियों ने चॉकलेट देकर बच्चों का स्वागत किया और उनकी इस पहल की सराहना की। इस दौरान मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव निरंजन ओहदार और सुनील उपस्थित रहे।
भावनाओं को जोड़ने का माध्यम है चिट्ठी: पोस्टमास्टर
गुमला मुख्य डाकघर के पोस्टमास्टर शिव शंकर ठाकुर ने स्कूल प्रबंधन और बच्चों के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि चिट्ठी केवल कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि भावनाओं और रिश्तों को जोड़ने का मजबूत माध्यम है। बचपन से ही बच्चों को पत्र लेखन व डाक सेवाओं से जोड़ना हमारी सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का सुंदर प्रयास है।”
डाक विभाग ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे इस रक्षाबंधन पर डाक सेवाओं के माध्यम से राखी और शुभकामनाएं भेजकर इस आत्मीय परंपरा को आगे बढ़ाएं।

