रांची में एबीवीपी ने निकाला छात्र गर्जना मार्च, लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती का लिया संकल्प

रांची। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ आह्वान पर मंगलवार को झारखंड की राजधानी रांची में छात्र गर्जना मार्च निकाला गया। मोरहाबादी में आयोजित जनसभा में हजारों विद्यार्थियों और एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान लोकतंत्र और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के कथित प्रयासों के खिलाफ एकजुटता प्रदर्शित करते हुए लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प लिया गया।

जनसभा के बाद कार्यकर्ताओं ने अल्बर्ट एक्का चौक तक मार्च निकाला, जहां कार्यक्रम का समापन हुआ। इसमें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व संयुक्त सचिव वैभव मीणा, एबीवीपी की केंद्रीय कार्यसमिति सदस्य दिशा दित्या, प्रांत मंत्री प्रकाश टूटी और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य बाबूलाल मेहता प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

सभा को संबोधित करते हुए वैभव मीणा ने कहा कि भारत का लोकतंत्र जनता के विश्वास, मताधिकार और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर आधारित है। सरकार चुनने और बदलने का अधिकार केवल जनता के पास है। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस और कम्युनिस्ट विचारधारा के नेताओं को मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने की प्रक्रिया शुरू होने पर ही लोकतंत्र की चिंता क्यों सताने लगती है।

मीणा ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का उद्देश्य किसी योग्य मतदाता का अधिकार छीनना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाना है। यदि किसी राजनीतिक दल को इस प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नजर आती है तो उसे तथ्यों और प्रमाणों के साथ अपनी बात रखनी चाहिए, न कि लोगों के बीच भ्रम फैलाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर योग्य नागरिक का वोट सुरक्षित रहना चाहिए और मतदाता सूची में पारदर्शिता भी जरूरी है।

वैभव मीणा ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक असहमति का स्वागत है, लेकिन भीड़ के दबाव और अराजकता के जरिए संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाना उचित नहीं है। निर्वाचन प्रक्रिया में किसी भी अनियमितता की शिकायत के लिए संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने निर्वाचन आयोग और उच्चतम न्यायालय जैसी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर राजनीतिक स्वार्थों के तहत सवाल उठाने को लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध बताया।

वैभव मीणा ने बांग्लादेश और नेपाल के घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन का माध्यम केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया हो सकती है। दावा किया कि दिल्ली विश्वविद्यालय, उत्तराखंड, केरल और ओडिशा के छात्रसंघ चुनावों में एबीवीपी को मिली सफलता विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास को दर्शाती है। उन्होंने युवाओं से संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सजग रहने की अपील की।

प्रदेश मंत्री प्रकाश टूटी ने कहा कि भारत की युवा शक्ति अपनी सांस्कृतिक विरासत, सभ्यतागत चेतना और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध से जुड़ी है। बांग्लादेश और नेपाल के घटनाक्रमों को भारत की परिस्थितियों पर लागू करने का प्रयास भारतीय समाज की विशिष्टता और सांस्कृतिक चेतना की अनदेखी है। उन्होंने कहा कि भारतीय युवा देश की समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक, रचनात्मक और लोकतांत्रिक रास्ते में विश्वास रखते हैं।

टूटी ने कहा कि रांची में छात्र गर्जना मार्च के माध्यम से विद्यार्थियों ने संदेश दिया है कि युवाओं की ऊर्जा राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने में लगनी चाहिए। युवाओं की भूमिका केवल परिस्थितियों पर प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें अपने विचारों और सक्रिय सहभागिता से देश के भविष्य के निर्माण में योगदान देना चाहिए।

केंद्रीय कार्यसमिति सदस्य दिशा दित्या ने एसआईआर का समर्थन करते हुए कहा कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसका उद्देश्य प्रत्येक योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल करना और अयोग्य एवं फर्जी प्रविष्टियों को हटाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस प्रक्रिया को लेकर भ्रम और नकारात्मकता का माहौल बना रही है। उनके अनुसार, लोकतंत्र की मजबूती के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी मतदाता सूची आवश्यक है।

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