देवघर: बाल सुधार गृह सह संप्रेषण गृह की बच्चियों को सशक्त, आत्मनिर्भर और हुनरमंद बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक ठोस पहल की है। समाहरणालय सभागार में उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी सौरभ कुमार भुवानिया की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में बच्चियों के पुनर्वास और कौशल विकास को लेकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य इन बच्चियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर समाज की मुख्य धारा से जोड़ना और उन्हें स्वावलंबी बना।
उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि 15 से 18 वर्ष आयु वर्ग की बच्चियों के लिए आगामी 3 नवंबर 2026 से 90 दिनों का विशेष कौशल संवर्धन कार्यक्रम शुरू किया जाए। उन्होंने कार्यक्रम से संबंधित सभी आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी तैयारियों को समय रहते पूरा करने के सख्त निर्देश दिए।
हुनर के साथ मिलेगा स्वास्थ्य शिक्षा का पाठ
प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत बच्चियों को उनकी रुचि और बाजार की मांग के अनुरूप ब्यूटीशियन और कंप्यूटर कोर्स का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त उनके समग्र शारीरिक व मानसिक विकास को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य से संबंधित बुनियादी शिक्षा (बेसिक हेल्थ एजुकेशन) भी प्रदान की जाएगी।
उपायुक्त ने कहा कि इस प्रशिक्षण का मूल उद्देश्य बच्चियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे यहाँ से निकलने के बाद समाज में पूरे आत्मसम्मान और गरिमा के साथ अपना जीवन यापन कर सकें।
समीक्षा बैठक में मुख्य रूप से उप विकास आयुक्त पीयूष सिन्हा, अनुमंडल पदाधिकारी रवि कुमार, सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा (एडीएसएस), सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी, डीएमएफटी (DMFT) की टीम और जिला कौशल विकास से जुड़े पदाधिकारी व प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

