पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार नहीं, हर नागरिक की जिम्मेदारी : हेमन्त सोरेन

रांची। मुख्यमंत्री हेमंत साेरेन ने वन महोत्सव कार्यक्रम में लाेगाें काे सम्बाेधित करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक और सामाजिक दायित्व है। जब तक आमजन इस दिशा में सक्रिय भागीदारी नहीं निभाएंगे, तब तक जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती का प्रभावी समाधान संभव नहीं होगा। उन्होंने सभी लोगों से पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने और हरित एवं समृद्ध भविष्य के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री शुक्रवार को रांची के खेलगांव स्थित हरिवंश टाना भगत इंडोर स्टेडियम में आयोजित 77 वें राज्यव्यापी वन महोत्सव-2026 में बोल रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन व उनकी धर्मपत्नी कल्पना सोरेन ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य का संदेश दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौतियों के बीच पौधारोपण पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्हाेंने ने राज्यवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन विश्व की सबसे गंभीर और चिंताजनक चुनौतियों में से एक बन चुका है। इसके प्रभाव अब केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मानव जीवन, कृषि, जल संसाधनों, जैव विविधता और समग्र विकास प्रक्रिया पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों से अधिक से अधिक पौधारोपण करने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति कम-से-कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसके संरक्षण एवं देखभाल का संकल्प भी ले।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जनभागीदारी सबसे प्रभावी माध्यम है। यदि राज्य का प्रत्येक नागरिक एक पौधा लगाकर उसकी जिम्मेदारी निभाए, तो आने वाले समय में झारखंड हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक मिसाल बन सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में विभिन्न अभियान के तहत लगाए गए पौधों की स्थिति का वे स्वयं जायजा लेंगे। साथ ही, पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों, संस्थाओं और समुदायों को प्रोत्साहित करने के लिए सम्मानित भी किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि पशु-पक्षियों, वन्यजीवों और अन्य जीव-जंतुओं को भी इसका भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्राकृतिक आवासों में बदलाव, जल स्रोतों का प्रभावित होना तथा पर्यावरणीय असंतुलन जैव विविधता के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों से निपटने के लिए पर्यावरण संरक्षण, पौधारोपण, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए स्थानीय और पारंपरिक वृक्ष प्रजातियों का संरक्षण एवं संवर्धन अत्यंत आवश्यक है। इससे न केवल हरित आवरण में वृद्धि होगी, बल्कि भूजल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता, स्वच्छ वायु और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को भी मजबूती मिलेगी।

77वें राज्य स्तरीय वन महोत्सव-2026 के अवसर पर मुख्यमंत्री ने वन संरक्षण, संवर्धन, जैव विविधता संरक्षण तथा सामुदायिक वन प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले राज्य के विभिन्न वन प्रमंडलों से चयनित 20 वन मित्रों एवं समिति प्रतिनिधियों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने सम्मानित व्यक्तियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण और हरित झारखंड के निर्माण में इनकी भूमिका प्रेरणादायी है।
इस अवसर पर विधायक कल्पना सोरेन, सचिव अबू बकर सिद्दीकी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख संजीव कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक विश्वनाथ शाह, एटी मिश्रा, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक वेंकटेश लू, जब्बेर सिंह, मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एसआर नेटेशा सहित वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

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