रांची: अश्विन मास की सर्वपितृ अमावस्या यानी महालया के साथ ही पितृपक्ष का समापन हो गया है और देवी पक्ष की विधिवत शुरुआत हो चुकी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महालया के दिन ही मां दुर्गा कैलाश पर्वत से पृथ्वी लोक के लिए प्रस्थान करती हैं। इसी के साथ देशभर में शारदीय नवरात्र और दुर्गा पूजा का उल्लास शुरू हो गया है। कल यानी प्रतिपदा तिथि को घरों और पूजा पंडालों में विधि-विधान से कलश स्थापना की जाएगी।
शास्त्रों में महालया का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन सुबह महिषासुर मर्दिनी के पाठ और चंडी पाठ के साथ मां का आह्वान किया जाता है। मान्यता है कि आज के दिन ही मूर्तिकार मां दुर्गा की प्रतिमाओं की आंखें बनाकर उन्हें अंतिम रूप देते हैं, जिसे ‘चक्षु दान’ कहा जाता है।
कल आश्विन शुक्ल प्रतिपदा के साथ शारदीय नवरात्र का विधिवत शुभारंभ होगा, जिसके पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाएगी। भक्त सुबह शुभ मुहूर्त में मिट्टी की वेदी पर जौ बोकर और कलश स्थापित कर मां भगवती का आह्वान करेंगे। नवरात्र को लेकर मंदिरों और पूजा पंडालों को भव्य रूप से सजाया गया है, जहां अगले नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना, व्रत और अनुष्ठान का दौर चलेगा।
