वैश्विक मांग को देखते हुए आयुर्वेद पर विशेष ध्यान दिया जाएगा: सीतारमण

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने वर्ष 2047 तक देश की जीडीपी में सेवा क्षेत्र का योगदान 10 फीसदी करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए इस क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। साथ ही निजी क्षेत्र के सहयोग से पांच क्षेत्रीय चिकित्सीय केंद्र बनाए जाएंगे, जिनमें आयुष केंद्र, चिकित्सीय पर्यटन और निदान क्षेत्र शामिल होंगे। इनसे डॉक्टर, नर्स और अन्य चिकित्सीय कर्मियों को रोजगार मिलेगा।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में अपने बजट भाषण में कहा कि ‘शिक्षा से रोजगार और उद्यमिता’ नाम की एक उच्चस्तरीय स्थायी समिति बनाई जाएगी, जो सेवा क्षेत्र को ‘विकसित भारत’ का मुख्य प्रेरक बनाने के लिए आवश्यक उपायों की सिफारिश करेगी। यह समिति वृद्धि, रोजगार और निर्यात की संभावनाओं को अधिकतम करने वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता देगी और उभरती तकनीकों, खासकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का नौकरियों और कौशल पर प्रभाव आंकेगी।

उन्होंने कहा कि कोविड के बाद योग और आयुर्वेद को काफी बढ़ावा मिला है। वैश्विक मांग को देखते हुए आयुर्वेद पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके तहत तीन नए अखिल भारतीय संस्थान बनाए जाएंगे, आयुष फार्मेसी और औषध परीक्षण प्रयोगशाला को उन्नत किया जाएगा और जामनगर स्थित विश्व स्वास्थ्य संगठन वैश्विक चिकित्सीय केंद्र को भी उन्नत किया जाएगा।

सीतारमण ने कहा कि कार्बन पकड़ने, उपयोग करने और भंडारण (सीसीयूएस) तकनीकों के लिए अगले पांच वर्षों में 20 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाएगा। बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सरकार ने जलमार्ग पर बड़ा फोकस किया है। अगले पांच साल में 20 नए जलमार्ग बनाए जाएंगे। ओडिशा में राष्ट्रीय जलमार्ग बनाया जाएगा ताकि खनिज संपन्न तालचेर और अंगूल को कनेक्ट किया जा सके और कलिंगनगर को पारादीप पोर्ट से जोड़ा जा सके। साथ ही देश में जहाज मरम्मत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने के लिए वाराणसी व पटना में विशेष सेंटर स्थापित किए जाएंगे।

एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत करने के लिए वित्त मंत्री ने 10 हजार करोड़ रुपये का एमएसएमई ग्रोथ फंड घोषित किया। टेक्सटाइल क्षेत्र को भी बूस्टर मिलेगा और पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में सरकार बुनियादी ढांचा को मजबूत करेगी।

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