बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान (बीआईटी), मेसरा के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग द्वारा “विदेशी भाषा शिक्षण एवं अधिगम में प्रौद्योगिकी, नैतिकता और सांस्कृतिक आयाम” विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन हाइब्रिड मोड में किया गया। सम्मेलन में भारत सहित विभिन्न देशों से शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली।
उद्घाटन सत्र प्रातः 10 बजे अनुसंधान एवं विकास भवन के सेमिनार हॉल–I में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में कार्यवाहक कुलपति डॉ. अशोक शेरोन, विभागाध्यक्ष डॉ. भास्कर कर्ण, डॉ. धर्मेन्द्र कुमार चंद, सम्मेलन संयोजक डॉ. मृणाल पाठक एवं डॉ. संदीप कुमार बिस्वास मंचासीन रहे। उद्घाटन समारोह की मुख्य अतिथि फ्रांस दूतावास, भारत की अधिकारी सुश्री जूलिया मार्टिन रहीं। दीप प्रज्वलन एवं संस्थान प्रार्थना के साथ सम्मेलन का औपचारिक शुभारंभ हुआ।
स्वागत भाषण में डॉ. भास्कर कर्ण ने प्रौद्योगिकी आधारित भाषा शिक्षण में नैतिकता और सांस्कृतिक संवेदनशीलता के महत्व पर जोर दिया। सम्मेलन संयोजक डॉ. मृणाल पाठक ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संदर्भ में कहा कि “एआई एक अद्भुत सेवक है, लेकिन एक विनाशकारी स्वामी।”
कार्यवाहक कुलपति डॉ. अशोक शेरोन ने उच्च शिक्षा में एआई और डिजिटल नवाचार की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हुए संस्थान में नए शैक्षणिक विभागों की पहल का उल्लेख किया।
मुख्य अतिथि सुश्री जूलिया मार्टिन ने “एआई युग में विदेशी भाषा शिक्षण: अवसर और चुनौतियाँ” विषय पर मुख्य व्याख्यान देते हुए एआई के लाभों और चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उद्घाटन सत्र का समापन धन्यवाद ज्ञापन, सामूहिक छायाचित्र एवं जलपान के साथ हुआ।
इसके पश्चात जेएनयू, नई दिल्ली के प्रोफेसर सुशांत कुमार मिश्रा ने “प्रौद्योगिकी विदेशी भाषा शिक्षण/अधिगम को किस प्रकार नया स्वरूप दे रही है?” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने एआई, स्मृति और विस्मृति के आपसी संबंध पर चर्चा करते हुए शिक्षक की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
दिन भर चले शोध पत्र प्रस्तुतिकरण सत्रों में गहन शैक्षणिक विमर्श हुआ। इस प्रकार सम्मेलन का प्रथम दिन सक्रिय चर्चाओं और बौद्धिक सहभागिता के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

