जब-जब राजनीति डगमगाती है, साहित्य उसे थाम लेता है : महुआ माजी

रांची। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू), रांची में हिन्दी विभाग एवं उच्च तकनीकी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में 20–21 जनवरी को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के पहले दिन मंगलवार को राज्यसभा सांसद एवं प्रसिद्ध साहित्यकार महुआ माजी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।

अपने संबोधन में महुआ माजी ने आदिवासी जीवन, परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पहले आदिवासियों को पिछड़ा और अप्रगतिशील समझा जाता था, लेकिन साहित्य और सिनेमा के माध्यम से यह धारणा बदली है। आज लोग आदिवासी समाज की लोक संस्कृति, उनके संघर्ष और जीवन मूल्यों को समझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और इसे विश्वस्तरीय पहचान दिलाना हम सभी का उद्देश्य होना चाहिए।

महुआ माजी ने युवाओं से राजनीति में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। राजनीति और साहित्य के संबंध को रेखांकित करते हुए उन्होंने रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की प्रसिद्ध पंक्ति दोहराई—“जब-जब राजनीति लड़खड़ाती है, तब-तब साहित्य उसे थाम लेता है।” उन्होंने कहा कि हिंदी साहित्य व्यक्ति को जीवन की दिशा देता है और समाज को समझने की दृष्टि विकसित करता है। साथ ही उन्होंने राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं की भी जानकारी दी।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. उपुल रंजीत हेवावीतानागमगे (हिन्दी अध्ययन विभाग, केलानिया विश्वविद्यालय, श्रीलंका), सामाजिक अभियंता एवं संस्कृति कर्मी बेचन उरांव (नेपाल), पूर्व भा.प्र.से. अधिकारी एवं कथाकार हरिराम मीणा (राजस्थान) उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. (डॉ.) धमेन्द्र कुमार सिंह ने की। इस अवसर पर हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. जिन्दर सिंह मुंडा, कुलसचिव डॉ. वासुदेव द्विवेदी तथा रांची वीमेंस कॉलेज की हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रज्ञा गुप्ता सहित अनेक शिक्षाविदों की गरिमामयी उपस्थिति से आयोजन को विशेष गरिमा प्राप्त हुई।

Report – Sandeep Kumar Rana

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