रांची, 2 जुलाई: मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में गुरुवार को आयोजित झारखंड मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य के विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रशासनिक सुधार और आधारभूत संरचना से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
कैबिनेट ने करीब ₹4,189 करोड़ की लागत से राजेन्द्र आयुर्विज्ञान संस्थान-II (RIMS-2) की स्थापना को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की। साथ ही परियोजना के कार्यान्वयन के लिए JAGRITI PMU के गठन तथा IIM रांची को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और XISS रांची को इम्पैक्ट असेसमेंट की जिम्मेदारी देने पर भी मुहर लगाई गई।
मंत्रिपरिषद ने आदिम जनजाति समूह (PVTG) के परिवारों को मनरेगा के तहत वर्तमान 100 दिनों के रोजगार के अतिरिक्त 50 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराने की स्वीकृति दी। राज्य सरकार ने इसे आजीविका सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय बताया।
बैठक में झारखंड योजना सेवा नियमावली-2026, राज्य समाहरणालय लिपिकीय संवर्ग नियमावली-2026 तथा निम्नवर्गीय लिपिक-सह-कम्प्यूटर संचालक सेवा संवर्ग नियमावली-2026 के गठन को मंजूरी दी गई। इसके अलावा नवनियुक्त सरकारी कर्मचारियों के लिए नियुक्ति के समय निष्ठा एवं गोपनीयता की शपथ को अनिवार्य बनाने का निर्णय भी लिया गया।
स्वास्थ्य क्षेत्र में विदेशी आयुर्विज्ञान स्नातकों (FMG) को राज्य चिकित्सा परिषद में निबंधन के क्रम में वृत्तिका (स्टाइपेंड) की सुविधा देने की स्वीकृति दी गई। वहीं सेवा में गंभीर अनियमितताओं के आरोप में एक चिकित्सा पदाधिकारी को बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया।
आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए चतरा, साहिबगंज, दुमका, रांची और पाकुड़ में सड़कों के निर्माण, चौड़ीकरण एवं पुनर्निर्माण की कई परियोजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई। रांची में बिरसा चौक से पुलिस मुख्यालय तक सड़क के सौंदर्यीकरण, साइकिल ट्रैक और अन्य आधुनिक सुविधाओं के विकास का भी मार्ग प्रशस्त हुआ।
कैबिनेट ने बोकारो के चंदनकियारी में पेमिया ऋषिकेश विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) जारी करने की मंजूरी दी। इसके अलावा श्रावणी मेला-2026 के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 28 अस्थायी मेला ओपी और 19 अस्थायी यातायात ओपी के गठन को भी स्वीकृति दी गई।
बैठक में विभिन्न न्यायालयों के आदेशों के अनुपालन, पदोन्नति, सेवा नियमितीकरण, पेंशन भुगतान, बाणसागर परियोजना से जुड़े जल बंटवारे, औद्योगिक लीज, विभागीय प्रोन्नति नीति में संशोधन तथा अन्य प्रशासनिक प्रस्तावों पर भी मंजूरी प्रदान की गई।

