रांची : रांची विश्वविद्यालय की अकादमिक काउंसिल की बैठक बुधवार को मास कॉम सभागार में कुलपति प्रो. सरोज शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित की गई। कुलपति बनने के बाद प्रो. शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित यह पहली अकादमिक काउंसिल बैठक थी, जिसमें 37 महत्वपूर्ण एजेंडों एवं प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।
बैठक की शुरुआत रजिस्ट्रार डॉ. राजकुमार शर्मा के परिचय भाषण से हुई। इसके बाद कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान समय एआई, भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) और MOOCs जैसे आधुनिक एवं प्रासंगिक विषयों को शिक्षा व्यवस्था में शामिल करने का है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को छात्रों के हितों और समय की जरूरतों के अनुरूप लगातार परिष्कृत होना होगा।
बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। रांची विश्वविद्यालय में एमए/एमएससी इन स्टैटिस्टिक्स तथा पीजी गणित विभाग में एमएससी डाटा साइंस पाठ्यक्रम शुरू करने की मंजूरी दी गई। इसके साथ ही एमए इन एजुकेशन कोर्स प्रारंभ करने पर भी सहमति बनी।
अकादमिक काउंसिल ने प्रवासी भारतीयों के लिए ‘डायस्पोरा स्टडीज सेंटर’ स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। कुलपति ने कहा कि विदेशों में बड़ी संख्या में ऐसे प्रवासी भारतीय हैं जो झारखंड और बिहार की भाषाओं एवं संस्कृति से जुड़ना चाहते हैं। यह केंद्र उनके लिए महत्वपूर्ण अकादमिक मंच बनेगा।
बैठक में मैनेजमेंट स्टडीज, योग, परफॉर्मिंग एंड फाइन आर्ट्स तथा लीगल स्टडीज विभागों के नाम में ‘स्कूल’ शब्द जोड़ने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। साथ ही विश्वविद्यालय की डिग्रियों और प्रमाण-पत्रों को बारकोड युक्त बनाने का निर्णय लिया गया।
एमबीए के छात्रों द्वारा पीएचडी पूर्ण करने पर उनकी डिग्री में ‘डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी इन मैनेजमेंट’ अंकित करने का प्रस्ताव भी स्वीकृत किया गया। विश्वविद्यालय के केमिस्ट्री विभाग में छह माह का पीएचडी कोर्स वर्क प्रारंभ करने तथा पूरे विश्वविद्यालय में पीएचडी कोर्स वर्क को एक समान बनाने पर सहमति बनी।
अकादमिक काउंसिल ने निर्णय लिया कि कॉलेजों में संचालित पीजी पाठ्यक्रमों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाएगा। साथ ही सेंटर फॉर इंडियन नॉलेज सिस्टम (IKS) स्थापित करने को भी मंजूरी दी गई।
बैठक में यह भी तय किया गया कि छात्रों को दी जाने वाली डिग्रियों में यूजीसी के नियमों के अनुरूप विषय एवं संकाय का नाम अनिवार्य रूप से अंकित किया जाएगा, ताकि उच्च शिक्षा एवं रोजगार के दौरान विद्यार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
परफॉर्मिंग एंड फाइन आर्ट्स विभाग में चार नए स्नातक पाठ्यक्रम शुरू करने पर सहमति बनी। वहीं यह निर्णय भी लिया गया कि कोई भी सर्टिफिकेट कोर्स एक वर्ष से कम अवधि का नहीं होगा तथा किसी स्किल आधारित कोर्स में 10 से कम छात्र होने पर उसे बंद करने पर विचार किया जाएगा।
बैठक के अंत में कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने कहा कि जिन विभागों में विद्यार्थियों की संख्या कम है, वहां नामांकन बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने विश्वविद्यालय में प्लेसमेंट को बढ़ावा देने के लिए जॉब फेयर आयोजित करने की भी घोषणा की। सभी प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित किए गए। धन्यवाद ज्ञापन विद्यार्थी सहायता निदेशक डॉ. सुदेश साहु ने किया।

