लोक लेखा समितियों में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए तकनीक का उपयोग जरूरी : ओम बिरला

तिरुवनंतपुरम। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने केरलम विधानसभा में कहा कि जनता के एक-एक रुपये का उपयोग पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से जनहित में होना चाहिए। इसके लिए संसद और राज्य विधानमंडलों की लोक लेखा समितियों को तकनीक के इस्तेमाल से अधिक प्रभावी बनाना होगा। उन्होंने कहा कि ऑडिट रिपोर्ट और ऑडिट आपत्तियां सामने आने के बाद भी कई मामलों का लंबे समय तक निस्तारण नहीं हो पाता। इस प्रक्रिया में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

बिरला ने विधानसभा में संसद और राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं की लोक लेखा समितियों के सभापतियों के दो दिवसीय सम्मेलन के बुधवार को समापन समारोह में कहा कि सम्मेलन में सभी के सहयोग से साझा संकल्प प्रस्ताव पारित किया गया है। यह आने वाले समय में संसद और राज्य विधानमंडलों की लोक लेखा समितियों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा।

उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली में तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। समितियों को तकनीक के माध्यम से जवाबदेही, पारदर्शिता और कार्यक्षमता बढ़ाने पर विचार करना चाहिए। संसद की समितियों में ऑडिट मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म के जरिए निगरानी की व्यवस्था विकसित की गई है। राज्यों में भी इसी तरह प्रभावी डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने की जरूरत है।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि कार्यपालिका का दायित्व योजनाओं और निर्णयों को लागू करना है, जबकि विधायिका की जिम्मेदारी उनकी निगरानी और समीक्षा करना है। केवल बजट बढ़ना किसी योजना की सफलता का प्रमाण नहीं है। यह देखना जरूरी है कि बजट में निर्धारित धन का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए हुआ है या नहीं। बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और तय समय-सीमा में काम पूरा होने की भी नियमित समीक्षा होनी चाहिए।

बिरला ने कहा कि सम्मेलन में ऑडिट के बाद संसदीय जांच और समीक्षा की प्रक्रिया में सुधार, समितियों के कामकाज की नियमित समीक्षा तथा सिफारिशों के अनुपालन पर चर्चा हुई। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) और लोक लेखा समितियों के बीच समन्वय मजबूत करने के साथ अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण की जरूरत पर भी विचार किया गया।

उन्होंने कहा कि तकनीक जवाबदेही और कार्यक्षमता बढ़ाने का माध्यम है, लेकिन इसे मानवीय संवेदनशीलता के साथ अपनाना चाहिए। देश के विकास में केंद्र और राज्यों की समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए संसद और राज्य विधानमंडलों की समितियों के बीच नियमित बैठकें, प्रशिक्षण, सम्मेलन और अनुभवों का आदान-प्रदान जरूरी है।

बिरला ने बताया कि सम्मेलन में 27 राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी ने कैग और लोक लेखा समितियों के कामकाज में तकनीक का अधिकतम उपयोग करने पर सहमति जताई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Top