रामगढ़। जंगलों में रहने वाले आदिवासियों की एकता ही उनकी ताकत है। शोषण के खिलाफ संघर्ष और आंदोलन ही एक मात्र रास्ता है। यह रास्ता दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने हमें दिखाया था। आज भी उनके संदेश हमें मार्गदर्शन देते रहते हैं। यह बातें मंगलवार को नेमरा गांव में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पिता शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देते हुए कही। उन्होंने कहा कि आज का दिन मेरे और पूरे परिवार के लिए बेहद गम से भरा है। यह सिर्फ मेरे लिए ही नहीं बल्कि देश और राज्य के उन सभी दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों के लिए पीड़ादायक दिन है। उनकी पहली पुण्यतिथि पर नेमरा गांव से सटे लुकैयाटांड़ में सोना सोबरन हाई स्कूल परिसर में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा अनावरण किया गया है। स्कूल परिसर में प्रतिमा का उद्देश्य यह है कि हमारे साथ-साथ हमारे आने वाली पीढ़ी भी हमारे संघर्षों और शहादतों को याद रखें। हमारे इतिहास उनके दिलों में जिंदा रहे, ताकि उनका भविष्य संवरे और आने वाली चुनौतियों को वह सुलझा सकें।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मौके पर अपने दादा सोबरन मांझी को भी याद किया। उन्होंने कहा कि जिस जगह पर अपने पिता की प्रतिमा उन्होंने स्थापित की है, उसी लुकैयाटांड़ के जंगल में उनके दादा का भी समाधि स्थल है। असामाजिक तत्वों ने बेरहमी से उनकी हत्या कर दी थी। शोषण करने वालों ने उस समय जो कांड किया था, आज भी वैसी घटनाएं सुनने को मिलती हैं। इससे स्पष्ट है कि शोषण करने वालों के चेहरे बदल गए हैं, लेकिन फितरत वही है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि नया दौर नई पीढ़ी का है। यह नई पीढ़ी पूरी ताकत के साथ आगे बढ़ रही है। लेकिन इसमें अच्छाई और बुराई दोनों शामिल हैं। नई पीढ़ी को सही रास्ता दिखाना होगा, ताकि उनका भविष्य उज्जवल हो सके। गुरुजी के आदर्श आज पूरे राज्य को संदेश दे रहे हैं। आज के दिन उन्हें पूरे राज्य में याद किया जा रहा है।
हेमंत सोरेन ने कहा कि आज हमें मौका मिला है कि शिबू सोरेन ने जिस राज्य की स्थापना की थी उसे सजाने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है और उनका प्रयास है कि उनकी जिम्मेदार सरकार अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे। सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाए और जनता की आवाज बेहद आसानी से सरकार तक पहुंचे इसकी व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी।
इस मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड का हर कोना वीरों से भरा पड़ा है। उनके पूर्वजों ने आजादी की लड़ाई लड़ी। अपने हक और अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उन्हीं वीरों के वंशज आज इस धरती पर मौजूद हैं। हमें अपनों से नहीं बल्कि दुश्मनों से लड़ना है। हमें अलग करने और एकता को तोड़ने के लिए कई ताकतें लगी हैं। लेकिन उन्हें सफल नहीं होने देना है।

