DSPMU की समस्याओं पर शिक्षा मंत्री से मिला आदिवासी छात्र संघ, 6 सूत्री मांगों पर कार्रवाई की उठी मांग

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU), राँची में शैक्षणिक एवं प्रशासनिक समस्याओं को लेकर आदिवासी छात्र संघ के अध्यक्ष विवेक तिर्की के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न छात्रहित के मुद्दों पर विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए शीघ्र समाधान की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में पूर्व DSPMU सचिव सीमा मुर्मू भी शामिल थीं।

ज्ञापन में कुड़ुख (उरांव), संथाली, नागपुरी, झारखंडी जनजातीय विभाग, BBA, MBA, कंप्यूटर विज्ञान एवं वाणिज्य (कॉमर्स) पाठ्यक्रमों में सीटों की कटौती वापस लेने, गैर-शैक्षणिक गतिविधियों में संलिप्त शिक्षकों की निष्पक्ष जांच, शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने, छात्रों पर दर्ज कथित झूठे मामलों को वापस लेने, AICTE से संबंधित पाठ्यक्रमों की मान्यता प्रक्रिया पूरी करने तथा “एक व्यक्ति–एक पद” के सिद्धांत को लागू करने की मांग की गई।

प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री को बताया कि विश्वविद्यालय में शैक्षणिक और प्रशासनिक अव्यवस्थाओं का असर छात्रों की पढ़ाई, शोध और भविष्य पर पड़ रहा है। छात्र संघ ने कहा कि उनका आंदोलन विद्यार्थियों के अधिकार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पारदर्शी प्रशासन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से है।

शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि अगले कुछ महीनों में छात्रसंघ चुनाव कराने की तैयारी की जा रही है। साथ ही विश्वविद्यालय में स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने नियमित पाठ्यक्रमों के विस्तार तथा विशेष रूप से कुड़ुख (उरांव) विभाग में सीटों की बहाली की दिशा में सकारात्मक पहल का भी भरोसा दिया।

मुलाकात के बाद आदिवासी छात्र संघ के अध्यक्ष विवेक तिर्की ने कहा कि यदि मांगों पर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो संगठन छात्रहित में लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपना आंदोलन और तेज करेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के भविष्य का केंद्र है और उसकी शैक्षणिक गरिमा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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