108 कलशों से महास्नान के बाद एकांतवास में गए भगवान जगन्नाथ, अब 15 दिन नहीं होंगे दर्शन

बोकारो | बोकारो के सेक्टर-4 स्थित जगन्नाथ मंदिर परिसर में बुधवार को देव स्नान पूर्णिमा के अवसर पर भगवान जगन्नाथ का विधि-विधान के साथ 108 कलशों के जल से महास्नान कराया गया। प्रत्येक कलश में जल के साथ दूध, नारियल पानी और गंगाजल मिलाकर भगवान का अभिषेक किया गया। महास्नान के बाद षोड़षोपचार पूजन, हवन और महाआरती संपन्न हुई। धार्मिक मान्यता के अनुसार महास्नान के उपरांत भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए भगवान जगन्नाथ को 15 दिनों के एकांतवास (अनासर काल) के लिए मंदिर के विशेष कक्ष में विराजमान किया गया है। इस अवधि में श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन नहीं होंगे। भगवान के अस्वस्थ होने की मान्यता के चलते श्रद्धालु उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए तृतीया तिथि से जड़ी-बूटियां अर्पित करना शुरू करेंगे। एकांतवास के दौरान मंदिर के सिंहासन पर भगवान के मुकुट की पूजा होगी तथा भगवान को गर्म वस्त्र पहनाए जाएंगे। 15 जुलाई को भगवान अपने नवयौवन स्वरूप में भक्तों को दर्शन देंगे। इसके अगले दिन 16 जुलाई को पूजा-पाहुंडी की रस्म के बाद दोपहर एक बजे भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा की भव्य रथ यात्रा निकाली जाएगी। पूजा-पाहुंडी की परंपरा का निर्वहन बीएसएल के डायरेक्टर इंचार्ज की ओर से किया जाएगा। रथ यात्रा सेक्टर-4 स्थित जगन्नाथ मंदिर से प्रारंभ होकर सेक्टर-1 स्थित राम मंदिर तक जाएगी। इसमें झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। 24 जुलाई को बहुरा यात्रा (वापसी रथ यात्रा) के साथ भगवान अपने धाम लौटेंगे। परंपरा के अनुसार माता रुक्मिणी के नाराज होने के कारण मंदिर का द्वार तत्काल नहीं खुलता, जिसके चलते भगवान को तीन दिनों तक मंदिर के बाहर ही विराजमान रहना पड़ता है।

बीमार भगवान को लगेगा जड़ी-बूटियों का भोग:::

एकांतवास के दौरान भगवान को शीघ्र स्वस्थ होने की कामना के साथ दालचीनी, जावित्री, काली मिर्च, लौंग और इलायची से तैयार औषधीय काढ़ा तथा खिचड़ी का भोग अर्पित किया जाएगा। पंडित मानस आचार्या ने बताया कि भगवान को मीठा प्रिय है। इसलिए अदरक के रस और काली मिर्च से तैयार विशेष पेड़े का भी भोग लगाया जाएगा। इस अवधि में प्रतिदिन होने वाली पांच आरतियों के स्थान पर केवल एक बार आरती होगी। पंडित हिमांशु शेखर दास एवं पंडित मानस आचार्या ने बताया कि इस वर्ष भी पिछले वर्षों की तरह भव्य और आकर्षक रथ यात्रा का आयोजन किया जाएगा। देव स्नान पूर्णिमा के अवसर पर मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी और सभी ने भगवान के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ तथा सफल रथ यात्रा की कामना की।

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