रांची, 24 जून। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची में मंगलवार को कुलपति डॉ राजीव मनोहर की अध्यक्षता में गांधी सभागार में अकादमिक काउंसिल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी संकायों के डीन, विभागाध्यक्षों, निदेशकों एवं समन्वयकों ने भाग लिया। इस दौरान विद्यार्थियों के शैक्षणिक, मानसिक एवं व्यक्तित्व विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।
बैठक में 22 अगस्त 2025 को आयोजित पिछली अकादमिक काउंसिल बैठक के एजेंडों की संपुष्टि की गई। साथ ही नए शैक्षणिक सत्र के स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में नामांकन हेतु उपलब्ध सीटों की संख्या को मंजूरी दी गई तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत संशोधित स्नातक पाठ्यक्रमों को स्वीकृति प्रदान की गई।
बैठक की शुरुआत में कुलपति डॉ राजीव मनोहर ने ‘विश्वास’ कार्यक्रम की घोषणा की। इसके तहत प्रत्येक विभाग में विद्यार्थियों को छोटे-छोटे समूहों में विभाजित कर शिक्षकों को मेंटर तथा विद्यार्थियों को मेंटी की भूमिका दी जाएगी। यह पहल विद्यार्थियों को शैक्षणिक मार्गदर्शन के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास, कौशल संवर्धन एवं जीवन के विभिन्न पहलुओं में दिशा प्रदान करेगी।
कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) द्वारा शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए क्रमशः ‘उत्कर्ष’ एवं ‘श्रेयस’ योजनाओं के अंतर्गत प्रतिभा शोध पुरस्कार की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। निर्धारित मानकों के आधार पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
विद्यार्थियों को प्रेरित करने के उद्देश्य से विभिन्न संकायों के टॉपर्स की उत्तरपुस्तिकाएं विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएंगी तथा ‘यूनिवर्सिटी टॉपर्स अकादमी’ का भी गठन किया जाएगा। इसके अलावा विश्वविद्यालय की एक ऑनलाइन पत्रिका प्रकाशित करने का निर्णय लिया गया, जिसमें विश्वविद्यालय की गतिविधियों के साथ शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के शैक्षणिक लेख भी प्रकाशित होंगे।
अकादमिक काउंसिल ने कई रोजगारोन्मुखी अल्पकालिक पाठ्यक्रमों को भी मंजूरी दी। इनमें यौगिक साइंस विभाग में सर्टिफिकेट कोर्स, सर्टिफिकेट कोर्स ऑन जेंडर एंड डेवलपमेंट इन झारखंड, जूलॉजी विभाग के अंतर्गत पीजी डिप्लोमा इन बायोइन्फॉर्मेटिक्स, स्ट्रेस मैनेजमेंट पर सर्टिफिकेट कोर्स, डिप्लोमा इन साइबर सिक्योरिटी तथा डिप्लोमा इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शामिल हैं।
विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रत्येक विभाग में ‘SHINE (Student Help Initiative for Nurturing Excellence)’ योजना के तहत रेमेडियल कक्षाओं के संचालन का भी निर्णय लिया गया।
कुलपति डॉ राजीव मनोहर ने कहा कि अकादमिक काउंसिल की यह बैठक विद्यार्थियों के अकादमिक, मानसिक एवं प्रतिभा विकास को केंद्र में रखकर आयोजित की गई। उन्होंने घोषणा की कि अब अकादमिक काउंसिल की बैठक प्रत्येक दो माह के अंतराल पर आयोजित होगी, ताकि महत्वपूर्ण शैक्षणिक निर्णयों के क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब न हो।
बैठक में डीएसडब्ल्यू डॉ सर्वोत्तम कुमार, कुलसचिव डॉ धनंजय वासुदेव द्विवेदी, परीक्षा नियंत्रक शुचि संतोष बरवार सहित सभी संकायों के डीन, विभागाध्यक्ष, निदेशक एवं समन्वयक उपस्थित थे। यह जानकारी विश्वविद्यालय के पीआरओ डॉ राजेश कुमार सिंह ने दी।

