बेरोजगारी से आत्मनिर्भरता तक: खरबूजा की खेती ने बदली प्रदीप मुंडा की जिंदगी

दो एकड़ में खरबूजा की खेती कर कमाए तीन लाख रुपये, युवाओं के लिए बने प्रेरणा

रांची (जनुम गांव): मेहनत, आधुनिक कृषि तकनीक और सही मार्गदर्शन के बल पर जनुम गांव के युवा किसान Pradeep Munda ने खेती को रोजगार का सफल माध्यम बनाकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। कभी रोजगार की तलाश में भटकने वाले प्रदीप आज खरबूजा की खेती से लाखों रुपये की आमदनी अर्जित कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं।

छह सदस्यीय परिवार से आने वाले प्रदीप मुंडा के परिवार में माता-पिता, दो छोटी बहनें और एक छोटा भाई हैं। दोनों बहनें वर्तमान में पढ़ाई कर रही हैं। सीमित आय और रोजगार के अवसरों की कमी के कारण परिवार आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा था। ऐसे समय में करीब दो वर्ष पूर्व उनका जुड़ाव Usha Martin Foundation से हुआ, जिसने उनकी जिंदगी को नई दिशा दी।

संस्था द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और आधुनिक खेती की जानकारी से प्रेरित होकर प्रदीप ने इस वर्ष दो एकड़ भूमि में खरबूजा की खेती की। उन्नत कृषि तकनीकों, नियमित निगरानी और वैज्ञानिक पद्धतियों के उपयोग से उन्हें लगभग 14 टन खरबूजा का उत्पादन प्राप्त हुआ। इस उत्पादन से उन्हें करीब 2.5 से 3 लाख रुपये की आय हुई, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है।

प्रदीप को संस्था की ओर से खरबूजा सहित विभिन्न नकदी फसलों के गुणवत्तापूर्ण बीज, ड्रिप इरिगेशन सिस्टम, सोलर इंसेक्ट ट्रैप और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया। साथ ही साप्ताहिक बैठकों के माध्यम से किसानों को उन्नत खेती, फसल प्रबंधन, उत्पादन बढ़ाने की तकनीक और बाजार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी दी जाती हैं।

Dr. Mayank Murari ने कहा कि ग्रामीण युवाओं को कृषि से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना संस्था का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि प्रदीप मुंडा की सफलता यह साबित करती है कि यदि किसानों को सही प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और निरंतर मार्गदर्शन मिले तो खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है।

वहीं प्रदीप मुंडा ने बताया कि पहले वे रोजगार की तलाश में थे, लेकिन फाउंडेशन से जुड़ने के बाद उन्हें आधुनिक खेती की जानकारी मिली। आज खेती से होने वाली अच्छी आमदनी के कारण वे अपने परिवार की जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभा पा रहे हैं और भविष्य में खेती का दायरा बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।

प्रदीप की सफलता की कहानी आज आसपास के गांवों के किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि आधुनिक तकनीक, मेहनत और सही मार्गदर्शन के सहारे खेती को लाभदायक और सम्मानजनक रोजगार के रूप में अपनाया जा सकता है।

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