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रांची सहित राज्य के कई हिस्से में बारिश, निचले इलाकों में पानी भरा, आज भी अलर्ट रांची: झारखंड के कई हिस्सों में शनिवार सुबह हुई आंधी और बारिश से लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली। राजधानी रांची में सुबह करीब 6:30 बजे अचानक आसमान काले बादलों से घिर गया और तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। तकरीबन दो घंटे तक हुई इस बारिश का असर शहर के कई इलाकों में देखने को मिला। तेज हवा के कारण डोरंडा स्थित नीलम कॉम्पलेक्स के पास एक बड़ा पेड़ सड़क पर गिर गया, जिससे कुछ देर के लिए यातायात बाधित रहा और जाम की स्थिति बन गई। इसके अलावा शहर के अन्य इलाकों में भी पेड़ और डालियां गिरने की घटनाएं सामने आईं। वहीं बरियातू के संस्कृति विहार सहित कई निचले इलाकों में जलजमाव (पानी भरने) से लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। धनबाद के तोपचांची में सबसे ज्यादा 77 मिमी बारिश मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटे में धनबाद के तोपचांची में राज्य में सर्वाधिक 77 मिलीमीटर (मीमी) बारिश दर्ज की गई। वहीं रांची में 42.6 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। हालांकि, दोपहर होते-होते बारिश थम गई और धूप निकल आई। आज 12 जिलों में आंधी-बारिश का ऑरेंज अलर्ट मौसम केंद्र ने 31 मई को राज्य के 12 जिलों में आंधी और बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में शामिल हैं: रांची, खूंटी, रामगढ़, हजारीबाग, कोडरमा, गिरिडीह, धनबाद, बोकारो, सरायकेला, जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) और चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका जताई गई है। मानसून अपडेट: झारखंड, बिहार और बंगाल में अच्छी बारिश संभव, लेकिन देश में कमजोर शुरुआत की आशंका मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, इस साल मानसून के पहले महीने (जून) में देश भर में औसत की केवल 92% बारिश होने का अनुमान है। इसके साथ ही जून के महीने में उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु में हीट वेव (लू) के दिन सामान्य से अधिक रहने वाले हैं। जून से सितंबर के बीच कहाँ, कैसी होगी बारिश? कमजोर मानसून से देश में खड़ी होगी दोहरी चुनौती; दाल-सब्जी और बिजली पर सीधा असर देश के बड़े हिस्से में मानसून की कमजोर शुरुआत और अधिक गर्मी के कारण आगामी दिनों में कई संकट खड़े हो सकते हैं: खेती के लिए चिंता: देश के अधिकतर बारिश आधारित कृषि क्षेत्रों में कम बारिश की आशंका है। इससे खरीफ फसलों—खासकर धान, दालों और तिलहन की बुवाई और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। महंगाई पर दबाव: कमजोर मानसून का सीधा असर सब्जियों, दालों और खाद्यान्नों की उपलब्धता पर पड़ता है। इससे खाद्य महंगाई बढ़ने का जोखिम रहेगा, जो आरबीआई (RBI) के महंगाई काबू रखने के उपायों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। बिजली और पानी का संकट: कम बारिश से जलाशयों में पानी का स्तर घटेगा। इसका सीधा असर पेयजल आपूर्ति, सिंचाई और जलविद्युत (हाइड्रोपावर) उत्पादन पर पड़ सकता है। गर्मी का दोहरा थपेड़ा: ‘कम वर्षा और अधिक गर्मी’ की दोहरी चुनौती से लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा। साथ ही श्रम उत्पादन में कमी और बिजली की मांग में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। डेटा बॉक्स: 25 साल में केवल 5 बार 90% से कम बरसे बादल पिछले 25 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में केवल 5 बार ही ऐसा हुआ है जब कुल मानसून सीजन में 90% से कम बारिश दर्ज की गई हो। 2001: 91% 2002: 81% (सूखा/कमजोर) 2003: 102% 2004: 87% (सूखा/कमजोर) 2005: 99% 2006: 100% 2007: 106% 2008: 98% 2009: 77% (भारी सूखा) 2010: 102% 2011: 102% 2012: 92% 2013: 106% 2014: 88% (सूखा/कमजोर) 2015: 86% (सूखा/कमजोर) 2016: 97% 2017: 95% 2018: 91% 2019: 110% 2020: 109% 2021: 99% 2022: 106% 2023: 94% 2024: 108% 2025: 108%
