जेसोवा का दिवाली मेला शुरू, चाईबासा-दुमका को लाइब्रेरी के लिए मिला 15-15 लाख का चेक

रांची। रांची के मोरहाबादी मैदान में दिवाली के पूर्व महिला उद्यमियों के हुनर, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों की झलक देखने को मिल रही है। झारखंड आईएएस ऑफिसर्स वाइव्स एसोसिएशन (जेसोवा) की ओर से आयोजित पांच दिवसीय दिवाली मेले में देश के अलग-अलग हिस्सों की हस्तकलाओं, पारंपरिक उत्पादों और स्थानीय कारोबार को मंच दिया गया है।

मेले का उद्देश्य केवल खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे होने वाली कमाई के जरिए जरूरतमंदों की मदद करना भी है। जेसोवा पिछले 26 वर्षों से जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने की दिशा में काम कर रही है।

इस बार भी मेले के माध्यम से शिक्षा, हस्तकला और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। दिवाली मेले का उद्घाटन मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने किया।

कार्यक्रम में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए।

जोसोवा की अध्यक्ष प्रीति कुमारी, उपाध्यक्ष अनिता सिन्हा, रीचा बर्नवाल समेत अन्य सदस्य मौजूद रहीं। मेले में कोहवर,सोहराय और मधुबनी पेंटिंग,स्वदेशी उत्पाद, पारंपरिक कपड़े व व्यंजन के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं आकर्षण का केंद्र रहेंगी। मेला प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक चलेगा।

मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने आयोजन की सराहना करते हुए जेसोवा और आईएएस एसोसिएशन को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन लोगों का मनोबल बढ़ाते हैं। दीपावली के अवसर पर आयोजित यह मेला जाति, धर्म और संप्रदाय से ऊपर उठकर लोगों को एक साथ आने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि मेले में देश के विभिन्न हिस्सों से उत्पाद लाकर उन्हें प्रदर्शित किया गया है। यहां अलग-अलग क्षेत्रों की संस्कृति, कला और परंपराओं की झलक देखने को मिलती है। यह आयोजन केवल आय बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि इससे होने वाली कमाई जरूरतमंदों की सहायता के लिए समूह के रूप में इस्तेमाल की जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में पुस्तकालयों को बेहतर बनाने जैसे कार्यों में भी सहयोग दिया जाता है।

मेले के दौरान सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए एनडीसी चाईबासा और दुमका को पुस्तकालय के लिए जेसोवा के माध्यम से 15-15 लाख की सहायता प्रदान की गई। वहीं, ब्लाइंड स्कूल के शिक्षक के मानदेय के लिए 98 हजार रुपये का चेक प्रदान किया गया। जेसोवा का प्रयास है कि दिवाली की खुशियां समाज के हर वर्ग तक पहुंचे और जरूरतमंदों को भी इसका लाभ मिले।

मोरहाबादी मैदान में लगे करीब 300 स्टॉल पर विभिन्न राज्यों के पारंपरिक उत्पाद, हस्तशिल्प और कलात्मक वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं।

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